टैक्स बचाने के लिए आयकर रिटर्न में किराये की फर्जी रसीद लगाने वाले अब सतर्क हो जाएं। मूल्यांकन वर्ष 2019-20 से आयकर विभाग ऐसी गतिविधियों पर और सख्ती करने जा रहा है। यदि जांच में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो विभाग नोटिस जारी करेगा।
दरअसल एक लाख रुपये तक सालाना किराये पर मकान मालिक की पैन डिटेल नहीं देनी होती है। करदाता इसी का फायदा उठाते हैं। सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के सदस्य सीए अतुल मेहरोत्रा बताते हैं कि आयकर विभाग ने इस बार नए संशोधित रिटर्न फार्म को इस तरह से तैयार किया है कि गलत दस्तावेज लगाने वाले तत्काल पकड़ में आ जाएंगे।
दस्तावेजों की पहचान अब कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया से होगी और भविष्य के लिए ये डाटा सुरक्षित भी रखें जाएंगे। अगर किसी डाटा का मिलान सही नहीं पाया गया तो विभाग कूटरचित दस्तावेजों के मामले में कार्रवाई कर सकता है। आयकर विभाग फार्म-16 से इलेक्ट्रॉनिक मैचिंग के जरिये फॉर्म में दर्ज किए गए डाटा का मिलान करेगा।
इसके अलावा फार्म में भरे गए डाटा का कई सोर्स से मिलान किया जाएगा। नए आईटीआर फॉर्म में एक ड्रॉप डाउन कॉलम दिया गया है, जिसमें करदाता को अतिरिक्त भत्तों की सूचना भी दर्ज करनी होगी। अक्सर देखा जाता है करदाता का घर होने के बाद भी आवास किराया भत्ता की सूचना दर्ज कर दी जाती है।