मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन ने किशोरों और युवाओं की स्लीप साइकिल को तोड़ दिया है। इससे उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन, माइग्रेन जैसा सिर दर्द और नाक, कान गले में एलर्जी जैसे लक्षण उभर रहे हैं। मस्तिष्क की सहन क्षमता घट गई। स्क्रीन पर अधिक सिर खपाने से मानसिक ऊर्जा कम हो रही है। हारमोंस का सामंजस्य भी बिगड़ रहा है। स्लीप फाउंडेशन के 300 रोगियों के सैंपल सर्वे में यह बात उभर कर सामने आई है।
सैंपल सर्वे में 10 साल के बच्चे से लेकर 18 साल तक के युवाओं को शामिल किया गया है। इनमें एक तीन साल का बच्चा भी है। जो फोन की स्क्रीन पर आठ से 10 घंटे खर्च करता है और उसको भी किशोरों जैसी दिक्कतें हो रही हैं। स्लीप फाउंडेशन के निदेशक सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि रोगियों की हिस्ट्री ली गई तो उसमें नींद चक्र गड़बड़ होने का मुख्य कारण अधिक स्क्रीन टाइम मिला है। बच्चों में छोटी सी बात पर झुंझलाने की प्रवृत्ति बढ़ी मिली है।