सहायक संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। पालिका के चल रहे अवैध वाहनों पर अंकुश लगाने के सवाल पर एआरटीओ ने दो टूक कहा, ‘बगैर रजिस्ट्रेशन वाहनों को चलने देेने में दिक्कत ही क्या है’।
फर्रुखाबाद जिले में बगैर रजिस्ट्रेशन के वाहनों को पकड़ने की जिम्मेदारी एआरटीओ विभाग की होती है। सूत्रों की मानें तो एआरटीओ कार्यालय में पुराने से पुराने वाहनों का फिटनेस देकर रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता है। पुराने सरकारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए एआरटीओ को अधिकार दिए गए हैं। वाहन के सेल लेटर आदि दिखाकर एआरटीओ तय करते हैं कि कितना जुर्माना लेना है।
आम आदमी का बगैर रजिस्ट्रेशन का वाहन चलते मिलने पर एआरटीओ विभाग के अफसर उसे पकड़कर सीज करते हुए कई धाराओं में जुर्माना वसूलते हैं। पर पालिका के वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। इस पर एआरटीओ की नजर तक नहीं जा रही है। या फिर यूं कहें कि एआरटीओ मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं।
ऐेसा इसलिए कि जब अमर उजाला संवाददाता ने पालिका के चल रहे अवैध वाहनों के बारे में पूछा तो पहले तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की, जबकि करीब नौ माह पहले ही उन्होंने बयान दिया था कि ईओ को नोटिस भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा जाएगा। जब उन्हें इसकी याद दिलाई तो उन्होंने दो टूक कहा कि सरकारी वाहन हैं, चलने दीजिए, दिक्कत क्या है। वह तो दुर्घटना के इंतजार में बैठे हैं। जब उनसे पूछा कि दुर्घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी तो उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होगी।
ईओ को नोटिस भेजने की कही थी बात
एआरटीओ संजय झा ने कहा था कि नगर पालिका में बिना रजिस्ट्रेशन वाहन चल रहे हैं तो ईओ को नोटिस भेजा जाएगा। जल्द ही नगर पालिका अधिकारियों से इस संबंध में पत्र व्यवहार करूंगा।