कानपुर में एक कारीगर ने दो पन्ने का सुसाइड नोट लिखकर फांसी लगा ली। कारीगर ने लिख 'सूदखोर मुझे जीने नहीं दे रहे हैं। 20 प्रतिशत ब्याज की दर से उधार लिए रुपये मेरे लिए जी का जंजाल बन गए। सूदखोरों के गुर्गे मेरे साथ घर और दुकान पर मारपीट करते हैं। जलालत की इस जिंदगी से तंग आकर जान दे रहा हूं।'
कुछ ऐसा ही दो पन्ने के सुसाइड नोट पुलिस को बर्रा जरौली निवासी अजय गुप्ता के पास से मिला। जूते चप्पल बनाकर बचने वाले कारीगर अजय की सचान चौराहे के पास दुकान है। व्यापार के लिए उसने बर्रा दो और बर्रा आठ निवासी सूदखोरों से रुपये ले रखे थे।
कर्ज चुकाने के बाद भी सूदखोर बकाया होने का दावा कर उसे परेशान करते रहे। शुक्रवार को अजय ने फांसी लगाने से पहले दो पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें दोनों सूदखोरों व उनके गुर्गों की वजह से मौत को गले लगाने की बात लिखी है।
शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद भैरवघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। चौकी इंचार्ज संतोष ओझा ने बताया कि सुसाइड नोट को फोरेंसिक टीम ने कब्जे में ले लिया है। परिजनों की तरफ से अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है।