कानपुर। भारतीय सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए) यूपी स्टेट चैप्टर के बैनर तले आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) में कहा गया कि अब रोगी के शरीर की क्षमता के लिहाज से उसे बेहोशी की दवा दी जाती है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एनआई) की मदद ली जाती है। एआई रोगी की स्थिति का आकलन करके बेहोशी की दवा की खुराक निर्धारित करता है। पहले की तरह अब जनरल सर्जरी वाली एनेस्थेसिया की एक-सी खुराक नहीं दी जाती।
सीएमई का आयोजन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थिएटर-1 में किया गया। इस मौके पर केजीएमयू लखनऊ के अनेस्थेसिया विभाग के विशेषज्ञ डॉ. तन्मय तिवारी ने बताया कि हर व्यक्ति के दर्द सहने की क्षमता अलग-अलग होती है, उसी लिहाज से दवा की खुराक निर्धारित करती है। अब जनरल एनेस्थेसिया नहीं पर्सनलाइज्ड दिया जाता है। इसमें एआई का सहयोग लिया जाता है।
सीएमई में इंट्रा-ऑपरेटिव एनेस्थीसिया के दौरान आने वाली विभिन्न जटिलताओं और एनेस्थीसिया प्रैक्टिस को सुरक्षित बनाने के उपाय पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि डॉ. संजय काला और विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक मालवीय रहे। इसके अलावा जी विशेष रूप से आमंत्रित थे। इसके अलावा स्टेट शाखा के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार दुबे, उपाध्यक्ष डॉ. कौशांत गुप्ता आदि रहे। कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष और मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व अग्रवाल, सह-आयोजन अध्यक्ष डॉ. आशीष पुरी, आयोजन सचिव डॉ. नेहा मिश्रा, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र, डॉ. अनिल वर्मा, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. सीएस सिंह आदि रहे।