आप जागरूक और अपने मोबाइल व डेस्कटॉप को अपडेट करके साइबर ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं। ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर एवं साइबर एक्सपर्ट संदीप शुक्ला ने कहा कि मोबाइल ऐप सुरक्षित नहीं हैं।
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दूसरी वजह पुराने वर्जन के एंड्रायड मोबाइल हैं। ये मोबाइल आपके ओटीपी को सुरक्षित नहीं रख सकते हैं। ऑनलाइन पेमेंट, खरीदारी और खातों में मनी ट्रांसफर करते समय सजग रहें। संभव हो तो लेटेस्ट वर्जन के एंड्रायड मोबाइल से अपने काम निपटाएं।
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डिजिटल लेनदेन करने के लिए प्लेस्टोर पर ढेरों ऐप हैं। डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने भी भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) और यूपीआई (यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस) सहित ढेरों ऐप शुरू किए। ये ऐप भी सुरक्षित नहीं हैं।
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ऐप को हैक करके साइबर ठग कई लोगों को चूना लगा चुके हैं। प्रो. संदीप शुक्ला ने बताया कि ऑनलाइन लेनदेन का जहां तेजी से चलन बढ़ा है, वहीं साइबर ठगी की घटनाएं भी हो रही हैं। ऐसे में आपको अपने मोबाइल अप्लीकेशन की खूबियों से परिचित होना बहुत जरूरी है।
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लाखों लोगों के हाथों में अभी भी एंड्रायड 6 व 7 वर्जन के मोबाइल हैं। ये दोनों वर्जन ऐप के जरिये डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में सेफ नहीं हैं। वहीं ऐप पर शुरू से सवाल उठ रहे हैं। ठग मैसेज या मेल के जरिये मालवेयरा (एक तरह का वायरस) आपके मोबाइल में भेजते हैं।
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एक्टिव होने के बाद वायरस हैकर को सारी जानकारियां देना शुरू कर देता है। प्रो. संदीप ने बताया कि बहुत कम लोगों के पास एंड्रायड 9 वर्जन के मोबाइल हैं। इस मोबाइल से प्राइवेसी लीक होने की संभावना कम है। डेस्कटॉप यूजरों को सलाह दी कि वे पायरेटेड विंडो का इस्तेमाल न करें।
कंपनियों के संदेशों को नजर अंदाज न करें
प्रो संदीप शुक्ला ने बताया कि लोग अपना मोबाइल और डेस्कटॉप विंडो को अपडेट नहीं करते हैं। हालांकि कि कंपनियों की ओर से समय-समय पर सिक्योरिटी पैच भेजे जाते हैं। यह वायरस को ब्लाक कर देता है।