अगर आपके पास एक से ज्यादा बैंकों में खाते हैं तो यूपीआई बड़े काम का एप है। ऑनलाइन खरीदारी, फंड ट्रांसफर करने के लिए यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई नाम का मोबाइल एप 50 से ज्यादा बैंक और ई-वालेट से जुड़ा है।
नोटबंदी के बाद ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से चलन में आया है। ऐसे में कई बैंक खातों का इस्तेमाल करने वालों को अलग-अलग मोबाइल एप डाउनलोड करने पड़े हैं। इसमें कई बार परेशानी भी आई। कैशलेस बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन के लिए एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कारपोरेशन ऑफ इंडिया) ने यूपीआई मोबाइल एप्लीकेशन लांच किया। इस एप से पेटीएम समेत कई ई-वालेट और राष्ट्रीकृत-निजी बैंक जुड़ गए हैं। अब तक 50 से ज्यादा बैंक जुड़े चुके हैं। करीब-करीब हर राष्ट्रीकृत और निजी बैंक की यूपीआई गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। जैसे एसबीआई, केनरा, पीएनबी, एक्सिस, यूबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद बैंक, यस बैंक आदि। इनके अलावा कई ऑनलाइन शापिंग एप भी इससे जुड़े हैं। यूपीआई एप से जुड़े हर बैंक खाते को ‘एम पिन’ से सुरक्षित करें। एम पिन डेट ऑफ बर्थ, होम एड्रेेस, ई-मेल आईडी से मिलाजुला न बनाएं।
ऐसे जुड़ें यूपीआई से
एंड्रायड फोन इस्तेमाल करने वाले इस एप को गूगल प्ले स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।
अपना मोबाइल नंबर यूपीआई पर रजिस्टर कराना होगा।
बैंक खाते की डिटेल (खाता नंबर, पैन नंबर, आईएफएससी (इंडियन फाइनेंसियल सिस्टम कोड), ब्रांच कोड भरें।
वीपीए (वर्चुअल पेमेंट एड्रेस) बनाना पड़ता है। ई मेल आईडी या अपनी किसी अन्य पहचान को वीपीए बनाएं
यही वीपीए आपका यूपीआई एड्रेस होगा। अब यूपीआई खाते में रकम मंगाने या किसी दूसरे के यूपीआई खाते में भेजने के लिए वीपीए की जरूरत होगी।
रकम भेजने और लेने वाले दोनों के पास एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाती है। ताकि आपकी सहमति के बाद ही आपके रकम आएगी या जाएगी।
जिस बैंक खाते को यूपीआई से जोड़ना हो उसके डेबिट कार्ड के आखिरी 6 नंबर और एक्सपायरी डेट डालने पर मोबाइल पर उस बैंक द्वारा भेजा ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) डालने पर 4-6 अंकों का ‘एम-पिन’ मिल जाता है।
आगे की बैंकिंग के लिए इसी एम-पिन का इस्तेमाल करें
एक यूपीआई से कई बैंक खातों को जोड़ सकते हैं। हर बैंक खाते का अलग ‘एम-पिन’ बनाना पड़ता है।
कई बैंक खातों, ई वालेट को अपने यूपीआई से जोड़ सकते हैं।
यूपीआई के फायदे
आमतौर पर बैंक ब्रांच या मोबाइल से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए बार-बार कार्ड नंबर, अकाउंट नंबर,आईएफएससी कोड डालना पड़ता है। यूपीआई में इससे छुटकारा है।
वीपीए गुप्त होने के चलते धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है।
सभी ई मर्चेंट को इस एक एप के माध्यम से पेमेंट की जा सकती है।
मोबाइल, बिजली-पानी, होटल, रेल, रेस्टोरेंट, रिटेल स्टोर के बिल दिए जा सकते हैं।
शिकायत और सुझाव का विकल्प भी उपलब्ध।