यादव फेमिली में 'मुलायम-शिवपाल' एक तरफ और 'रामगोपाल-अखिलेश' एक तरफ खड़े नजर आ रहे हैं। इनके बीच में कूद पड़ी है मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव... आप जानकर हैरान होंगे कि इस लड़ाई में यह नाम अचानक क्यों उछला है। बता दें इसके पीछे विशेष कारण है, जो इस रिपोर्ट के माध्यम से आप जान सकते हैं। पढ़िए ये खास रिपोर्ट...
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दरअसल, मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को लेकर एक नई बात निकलकर सामने आई है। कहा जा रहा है कि शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव से भी पहले अपर्णा ने अखिलेश को बड़ी नसीहत दी थी, जिसका खुलासा अब हुआ है।
मुलायम के परिवार में सपा के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद चल रहा है। यूपी विधानसभा चुनाव के बाद से तो लड़ाई खुल्लम खुल्ला को हो गई है।शिवपाल यादव सपा अध्यक्ष अखिलेश पर पार्टी का अध्यक्ष पद मुलायम सिंह के लिए छोड़ने का दबाव बना रहे हैं।
अपर्णा यादव (फाइल फोटो)
बता दें यह बात अपर्णा यादव भी कह चुकी हैं कि मुलायम सिंह को अध्यक्ष पद लौटा दिया जाना चाहिए। उनके परिवार में मुलायम सिंह यादव, उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव और छोटे बेटे प्रतीक यादव, बहू अपर्णा यादव और शिवपाल एक तरफ हैं जबकि रामगोपाल यादव परिवार के इस विवाद में शुरू से ही मुलायम और शिवपाल के खिलाफ अखिलेश के साथ खड़े हैं।
मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटवाने में भी रामगोपाल यादव का बड़ा रोल था। अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश यादव पार्टी में अब तक कई तरह के बदलाव कर चुके हैं। पहले सदस्यता अवधि तीन वर्ष की होती थी, अब संविधान में संशोधन के बाद इस अवधि को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है।
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पिछली बार समाजवादी पार्टी का सदस्यता अभियान 1 जुलाई 2014 से 30 सितंबर 2014 तक चला था, जिसमें 1 लाख 44 हजार सक्रिय सदस्य और 75 लाख प्रारंभिक सदस्य बने थे। इनकी अवधि 30 जून, 2017 को समाप्त हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सदस्यता अभियान फिर से शुरू किया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं को पार्टी मेंबरशिप के दिलाते हुए
इस चलते यादव परिवार में बात बनने के बजाय बिगड़ती जा रही है। कुछ रोज पहले शिवपाल यादव ने इटावा में चचेरे भाई रामगोपाल यादव पर हमला बोला था। शिवपाल ने उन्हें शकुनि तक कह डाला। मामला यह है कि दो दिन पहले रामगोपाल यादव से इटावा में ही मीडिया ने जब पूछा कि शिवपाल यादव का कहना है कि अखिलेश यादव को अपने वादे के मुताबिक अब नेताजी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद दे देना चाहिए तो इस पर भड़क कर रामगोपाल ने जवाब दिया कि शिवपाल यादव बेकार की बातें करते हैं। उन्होंने पार्टी का संविधान नहीं पढ़ा है। पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है। शिवपाल तो अभी सदस्य तक भी नहीं बने हैं।
इसको लेकर बाद में शिवपाल ने कहा कि मैंने संविधान भले ही न पढ़ा हो लेकिन शकुनि को गीता जरूर पढ़नी चाहिए। इसके बाद वे बोले अखिलेश यादव यूपी विधानसभा चुनावों के वक्त मुलायम सिंह को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद से हटाकर खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। उन्होंने मीडिया से कहा था कि वह सिर्फ तीन महीने के लिए अध्यक्ष बने हैं और चुनाव के बाद वह नेताजी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद लौटा देंगे।