अगर आपका बच्चा रेप, सेक्स या फिर शरीर में आ रहे बदलावों के बारे में चर्चा करता है तो ध्यान रहे उसकी बातों का जवाब उसे आपके माध्यम से मिले न कि गूगल से। अभिभावकों से मिले जवाबों से बच्चा पूरी तरह से संतुष्ट होगा साथ ही उसके क्रास क्वेश्चन और मन में चल रही उथल-पुथल को भी आप समझ लेंगे।
यह बात अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स की ओर से सेक्स एजूकेशन पर गुरुवार को आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता आईआईटी कानपुर के ह्यूमेनिटीज और सोशल साइंस के विभागाध्यक्ष और साइकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बृजभूषण ने कही। उन्होंने कहा कि कहा कि अभी भी कई भारतीय परिवारों में सेक्स एजूकेशन पर बात करना मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है, लेकिन अब समय आ गया है, इन विचारों को बदलने का।
टीवी के एड को देखकर बच्चे के मन में उठे सवालों के जवाब दें न कि झटके से चैनल बदल दें। उन्होंने कहा कि अगर पहली बार में बच्चे के पूछे गए सवाल पर आप झेंपेंगे या टालेंगे तो वह गूगल की ओर रुख करेगा। ऐसा करना काफी घातक होगा। उन्होंने सेक्स एजूकेशन को कोर्स में शामिल करने से मना करने वाले कई राज्यों के बारे में बताया।
साथ ही कहा कि कैसे 2007 में जब गुजरात में एक ऐसी व्यवस्था लागू हुई, जिसके माध्यम से छात्रों से कहा कि बिना नाम लिखे वह मन में उठ रहे प्रश्नों को पूछें तो 10 और 12 साल की उम्र के बच्चों ने शारीरिक बदलाव व सेक्स जिज्ञासाओं के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार ने सेक्स एजूकेशन के बजाए जेंडर एजूकेशन के रूप में इसे लागू किया है। वहीं, वेबिनार में शामिल लॉट्स ऑफ लर्निंग संस्था की संस्थापक स्नेहा शाह गुप्ता ने कहा कि कई अभिभावक यह सोचते हैं कि बड़ा होगा तो अपने आप सीख जाएगा, अभी यह उम्र नहीं है बात करने की।
यहीं से अभिभावक गलती करना शुरू कर देते हैं। छोटे से ही अगर बच्चों को सही व गलत की जानकारी नहीं दी गई तो वे राह भटक जाएंगे। सही शब्दकोश के साथ बच्चों को हर जानकारी दें। वेबिनार में मुख्य रूप से आकांक्षा जैन, ज्योति, वंदना मिश्रा, कविता दीक्षित, प्रभा पांडेय, रिचा अग्रवाल, सुषमा चौहान, अनु गोयल, डॉ. अनुपम जैन आदि शामिल हुईं।