यूपी के कानपुर शहर की अनुप्रिया गोयनका आज बॉलीवुड का फेमस चेहरा बन चुकी है। ‘पद्मावत’, ‘टाइगर जिंदा है’ जैसी बड़ी हिट फिल्में करने के बाद अनुप्रिया के चाहने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। अऩुप्रिया का बचपन कानपुर में गुजरा लेकिन पढ़ाई दिल्ली में पूरी हुई। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2008 में मुंबई जाकर एक्टिंग और मॉडलिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना शुरू कर दिया। अनुप्रिया ने ‘बॉबी जासूस’, ‘ढिशुम’, ‘डैडी’ फिल्मों में भी अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन अनुप्रिया को पहचान ‘पद्मावत’ और ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म से मिली। साल 2017 में आई सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में अनुप्रिया ने पूर्णा नाम की नर्स का किरदार निभाया था। इसके बाद साल 2018 में रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ में राजा रावल रतन सिंह की पहली रानी नागमती का रोल अदा किया। अनुप्रिया के परिवार में उनकी दो बड़ी बहनें और एक भाई है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई ज्ञान भारती विद्यालय, साकेत- नई दिल्ली से की थी और इसके बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई कॉमर्स में शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से की। हिन्दी फिल्मों के अलावा अनुप्रिया तेलुगु भाषा की फिल्मों में भी काम करती हैं। शहर के खपरा मोहाल में अनुप्रिया की राम राय जोखीराम धर्मशाला बनी है। उनके पिता रविंद्र कुमार गोयनका का शहर में कपड़े का कारोबार था लेकिन दिल्ली में शिफ्ट होने के बाद उनका बिजनेस बंद हो गया। अनुप्रिया छह साल तक कानपुर में रहीं उसके बाद परिवार के साथ दिल्ली चली गई थीं।
जानें अनुप्रिया के बारे में
अनुप्रिया गोयनका का इंटरव्यू
नाम: अनुप्रिया गोयनका
जन्म: 29 मई 1987, विष्णुपुरी, कानपुर
पिता: रविंद्र कुमार गोयनका (कपड़ा व्यवसायी)
मां: पुष्पा गोयनका (गृहणी)
शिक्षा: शहीद भगत सिंह कॉलेज
पेशा: एक्टिंग और मॉडलिंग
उपलब्धि: पद्मावत, टाइगर जिंदा है, पाठशाला, ढिशुम, डैडी, बॉबी जासूस फिल्में में एक्टिंग
बोल्ड अंदाज में किया लेस्बियन विज्ञापन
अनुप्रिया गोयनका का इंटरव्यू
अनुप्रिया ने अपने बोल्ड अंदाज में भारत के पहले लेस्बियन विज्ञापन में काम करके सबको हैरान कर दिया। डायरेक्टर शामिक सेन गुप्ता की इस एड फिल्म एनॉक-मिन्त्रा (बोल्ड इज ब्यूटीफुल) की वजह से अनुप्रिया के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। अनुप्रिया ने कई बॉलीवुड स्टार्स के साथ तमाम एड फिल्मों में काम किया है। इसके अलावा अनुप्रिया ने एपिक चैनल के टीवी सीरियल ‘स्टोरीज बाय रविंद्र नाथ टैगोर’ में भी काम किया था।
संघर्ष के दौरान धैर्य बनाये रखना पिता से सीखा
अनुप्रिया गोयनका का इंटरव्यू
शहर के विष्णुपुरी इलाके में मारवाड़ी परिवार में जन्मी अनुप्रिया का कहना है कि बंगले में रहने बाद दिल्ली में जाकर मुझे छोटे घर में रहना पड़ा। उसके बाद मुंबई में मेरा संघर्ष और बढ़ गया। एक बार तो ऐसा लगा कि मुझे अब अपना फैमिली बिजनेस अपना लेना चाहिए। लेकिन मैने हिम्मत नहीं हारी। रह-रहकर पिता की बातें याद आती थीं। संघर्ष के दौरान धैर्य बनाये रखना मैने अपने पिता से सीखा। मैने अपने जीवन में बहुत सारे उतार चढ़ाव देखे हैं। जब मैं 12वीं में पढ़ती थी तो पहली बार एनएसडी दिल्ली में थियेटर करने का मौका मिला। तीन होमलोन की ईएमआई मैं आज भी भर रही हूं। फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष कभी खत्म नहीं होता। इस इंडस्ट्री में लगातार काम करते रहने से ही एक्टर कामयाब होता है। मैं कई बार भयभीत हुई डिप्रेशन में भी चली गई लेकिन घरवालों ने मुझे हमेशा सपोर्ट किया। यही वजह है कि आज मैं फिल्मों में कुछ अच्छा कर पा रही हैं। मैने अपने जीवन में बहुत सारी असफलताएं देखी हैं लेकिन मेरा विश्वास हमेशा आगे बढ़ने में था। मैं जब भी परेशान होती हूं अक्षय कुमार की बात ‘कोशिश करते रहना जरूरी है रास्ते अपने आप बन जाते हैं’ को हमेशा याद करती हूं।
कानपुर के लोग टैलेन्टेड और हिम्मतवाले, युवाओं में है अलग जज्बा: अनुप्रिया
अनुप्रिया गोयनका का इंटरव्यू
‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में अनुप्रिया ने कहा कि अपने काम को लेकर निष्ठावान रहना बहुत जरूरी है। कानपुर में बहुत सारा टैलेन्ट है यहां के लोगों में अलग ही जज्बा होता है। कानपुर के लोगों में काफी हिम्मत होती है। सभी को अपने टैलेन्ट पर विश्वास होना चाहिए और इसे समय-समय पर तराशते भी रहना चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करना बहुत जरूरी है। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से ज्यादा आपको अपने काम पर फोकस करना चाहिए। कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए क्योंकि यहां बहुत सारा काम है। केवल एक्टर ही नहीं राइटर, डायरेक्टर, सिंगर, म्यजूशियन के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं। आज कल वेब सिरीज में काम करने वाले आर्टिस्ट भी काफी फेमस हो रहे हैं। इंडस्ट्री में अब अलग तरीके की फ्लिमें बन रही हैं। टैलेन्ट के साथ-साथ कठिन परिश्रम बहुत जरूरी है। आपको कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अपना गोल पता होना चाहिए। मैं हमेशा एक्टिंग के लिए पैशनेट थी। मैने खूब मन लगाकर काम किया। इतिहास को प्रदर्शित करती फिल्में सच का आईना होती हैं। इतिहास को लेकर फिल्में बनाने वालों को सपोर्ट करना चाहिए न कि उनका विरोध। पद्मावती के बारे में मैं अच्छी तरह से जानती हूं। मैं राजस्थान में रह चुकी हैं वहां की संस्कृति समझती हूं। इतिहास पर आधारित फिल्में दर्शकों में भी उत्साह भरती हैं।