सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी का कार्यकाल छह महीने बढ़ा दिया गया है। एसआईटी ने शासन से कार्यकाल बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था। अब एसआईटी के पास मई 2022 तक जांच पूरी कर गिरफ्तारियां करने का समय है।
हालांकि केसों की विवेचना लगभग खत्म हो चुकी है। कागजी कार्यवाही के बाद केवल आरोपियों की गिरफ्तारी बची है। सिख विरोधी दंगे में कानपुर में 127 लोगों की हत्या हुई थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सुबूतों और गवाहों के अभाव में कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
फरवरी 2019 में शासन ने एसआईटी गठित की थी। हत्या कर डकैती के कानपुर के 11 मामलों की जांच एसआईटी ने की। साक्ष्य जुटाने, गवाह व वादी खोजने के साथ ही 66 आरोपियों की शिनाख्त भी की। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की।
27 नवंबर 2021 को एसआईटी का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, लिहाजा एसआईटी प्रमुख ने शासन को पत्र भेजकर समय बढ़ाने की मांग की थी। सोमवार को शासन ने 27 मई 2022 तक एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा दिया है।
एक दर्जन से अधिक दंगाई कई हत्याकांड में थे शामिल
एसआईटी ने 80 से अधिक आरोपियों की शिनाख्त की। सत्यापन में पता चला कि 66 आरोपी ही जीवित हैं। एसआईटी एसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि एक-दो की गवाही बाकी है। अन्य कार्रवाई पूरी हो चुकी है। कागजी कार्यवाही पूरी कर जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि करीब एक दर्जन दंगाई ऐसे हैं, जो कई हत्याकांड में शामिल थे।