सिख विरोधी दंगों के सबसे बड़े आरोपी पूर्व मंत्री के भतीजे राघवेंद्र सिंह कुशवाहा की अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी है। एसआईटी अब उसकी कभी भी गिरफ्तारी कर सकती है। एसआईटी ने दबिश देना शुरू कर दिया है।
31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भड़के दंगों में कानपुर के 127 सिखों की हत्या हुई थी। इनमें से निराला नगर में रक्षपाल सिंह, भूपेंदर सिंह व सतवीर सिंह काला को भी मारकर जला दिया गया था। एसआईटी इस तिहरे हत्याकांड में अब तक एक दर्जन आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
केस का मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री शिवनाथ सिंह कुशवाहा का भतीजा राघवेंद्र सिंह कुशवाहा है। उसने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई थी। एसआईटी डीआईजी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई के बाद राघवेंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। एसआईटी ने उसके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य कोर्ट में पेश किए थे। अब उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।