आयोग की रिपोर्ट से मिली मदद
जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग ने दंगों की विस्तृत जांच की थी। कुछ समय पहले एसआईटी ने गृह मंत्रालय से अनुमति लेकर आयोग से रिपोर्ट ली। जिसमें कानपुर में हुए दंगों से संबंधित तमाम दस्तावेज मिले। जो शपथ पत्र मिले उसमें आरोपियों और गवाहों के नाम पते यहां तक कि जिनके पास फोन था उनके नंबर भी उसमें दर्ज थे। इस रिपोर्ट से आरोपियों तक पहुंचने में एसआईटी को काफी मदद मिली है।
कुछ मर गए तो कुछ बहुत उम्रदराज हैं आरोपी
सिख विरोधी दंगे के बाद 37 साल का वक्त बीच चुका है। यही वजह है कि जिन आरोपियों को एसआईटी ने चिह्नित किया है उसमें से कइयों की मौत हो चुकी है। आधा दर्जन से अधिक आरोपी 75 वर्ष से ऊपर के हो गए हैं। एक दो आरोपी कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित हैं। इसलिए एसआईटी इस तथ्य को शासन के सामने रखेगी। शासन निर्णय लेगा कि बीमार और उम्रदराज आरोपियों की गिरफ्तारी होगी या नहीं।
आठ केसों की विवेचना पूरी हो गई है। शासन से अनुमति लेकर गिरफ्तारी की जाएगी। कुछ इसमें वकील भी शामिल हैं, जो आरोपी हैं।
बालेंदु भूषण सिंह, एसएसपी एसआईटी