सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने एक और पीड़ित परिवार को खोज निकाला। दिल्ली में पीड़ित परिवार की महिला के बयान दर्ज किए। महिला ने बताया कि उनके सामने पिता और भाई को दंगाइयों ने पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया था।
इसके बाद दोनों को जिंदा जला दिया। वह और घर के अन्य लोग किसी तरह वहां से जान बचाकर भाग निकले। एसआईटी के मुताबिक दबौली निवासी जगजीत सिंह पत्नी बलजीत कौर, बेटी परमजीत कौर, बेटे हरचरन सिंह समेत अन्य बच्चों के साथ रहते थे।
परमजीत अब दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने बताया कि सैकड़ों दंगाइयों ने घर पर हमला बोला था। दरवाजा तोड़कर भीतर घुस आए और पिता व भाई को मार डाला। इसके बाद वे अन्य घर वालों को लेकर शहर से चली गई थीं।
मैंने मौत को करीब से देखा
परमजीत ने बताया कि दंगाइयों ने उन्हें भागते हुए देख लिया था। पीछा कर जलती हुई चादर उनके ऊपर फेंक दी थी। चादर उनके पैर पर गिरी थी। झुलसने का निशान आज भी उनके पैर पर है। चंद सेकेंड और रुकतीं तो वह भी जिंदा न होती।