1984 सिख विरोधी दंगा में अपने पति को खोने वाली महिला ने लंदन से न्याय की गुहार लगाई है। महिला ने एसआईटी को फोन पर दंगाइयों की बर्बरता की दास्तां बताई। एसआईटी ने उनके बयानों को रिकॉर्ड किया है।
चकेरी की जेके कालोनी में एक नवंबर 1984 को दंगाइयों ने दो सगे भाइयों सरदार सुरेंदर सिंह और नरेंदर सिंह की नृशंस हत्या कर घर फूंक दिया था। एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि नरेंदर सिंह की पत्नी मंजीत कौर परिवार समेत शहर से पलायन कर पंजाब चली गई थीं।
कुछ वर्षों तक वह पंजाब में रहीं। फिर परिवार समेत लंदन शिफ्ट हो गई थीं। पंजाब जाकर टीम ने परिवार के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद उनसे फोन पर बात कर बयान लिए। बर्बरता की रात की दास्तां बयां करते-करते वह रोने लगीं।
उन्होंने बताया कि लाठी डंडे से लैस सैकड़ों लोगों ने घर पर हमला कर दिया था। लूटपाट कर दंगाइयों ने ईंट-पत्थरों से कूंचकर नरेंदर और सुरेंदर को मार दिया था। वह और बाकी परिजन बच्चों को बचाकर किसी तरह से वहां से भाग निकले थे। एसएसपी ने बताया कि सुरेंदर का परिवार चेन्नई पलायन कर गया था। इसलिए 25 जनवरी को टीम चेन्नई जाकर सुरेंदर की पत्नी व अन्य परिजनों के बयान दर्ज करेगी।
भारत आने से इंकार, आज भी जख्म नहीं भरे
मंजीत कौर ने एसआईटी के अफसरों से कहा कि वारदात की रात हुई घटना को वह आज तक नहीं भूल सकी हैं। वह बच्चों को लेकर मकान के पिछले हिस्से से किसी तरह निकली थीं। उन्होंने कहा कि वह न्याय चाहती हैं लेकिन अब वह कोर्ट में बयान दर्ज कराने शहर नहीं आ पाएंगी। एसआईटी का कहना है कि बयान की कॉल रिकॉर्डिंग कोर्ट में पेश की जाएगी। दंगाइयों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। कई लोगों के बारे में जानकारी मिली है।