आंटी पीएचसी खुलता ही नहीं, कमरों में भरा भूसा-गेहूं
कीरतपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान मुकेश कुमार ने बताया कि आंटी पीएचसी कभी खुलता ही नहीं। यहां डॉक्टर, फार्मासिस्ट भी नहीं आते। कुछ दिन पहले विशेष अभियान के तहत कोरोना टीकाकरण हुआ था, तभी यह अस्पताल खुला था। इससे यहां अराजक तत्वों का जमावड़ा भी लगता है।
बताया गया कि कुछ ग्रामीण अस्पताल में भूसा और गेहूं भी रखते हैं। इस पीएचसी से आंटी, सखरेज, अग्निहोत्री निवादा, कमलापुर, सकरवां, जिंदपुर, दलीप नगर सहित कई गांव जुड़े हैं, पर किसी को कोई लाभ नहीं। ग्रामीण रणजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल न खुलने से वह मां का इलाज कराने शिवली जाते हैं। इस तरह यह अस्पताल महज कागजों पर जिंदा है।
मुश्ता में डाक्टर आते नहीं, सिर्फ लगता टीका
मुश्ता की ग्राम प्रधान रामबेटी के पति मुन्नालाल ने बताया कि पीएचसी में सर्दी, जुकाम-बुखार की दवा पहले तो मिल जाती थी, पर जब से कोरोना लगा, तब से न तो डॉक्टर आते हैं और न ही कर्मचारी। इस कारण गांव के लोग या तो झोलाछाप क्लीनिकों से दवा लेते हैं या फिर शिवराजपुर सीएचसी जाते हैं। पीएचसी की चहारदीवारी टूटी होने से छुट्टा पशु और पालतू पशु यहां की सबसे बड़ी समस्या हैं। यही नहीं, परिसर में बनी पानी की टंकी को भरने के लिए सबमर्सिबल लगा है, लेकिन यहां के कर्मचारी इसे चलाते ही नहीं। इससे भूलेभटके कुछ मरीज आते भी हैं तो उन्हें पीने के पानी के लिए हैंडपंप तलाशना पड़ता है।
सीएचसी शिवराजपुर से आंटी, बीरामऊ, डुड़वा जमौली और मुश्ता पीएचसी अटैच हैं। कई पीएचसी में आयुष चिकित्सक तो कई जगह डॉक्टरों की तैनाती है, लेकिन कोविड-19 के कारण लगभग सभी डॉक्टरों की ड्यूटी कोविड कंट्रोल रूम में लगी है। ऐसे में पीएचसी या तो बंद हैं या फिर विशेष दिनों में टीकाकरण के लिए खोले जाते हैं। बजट के अभाव में कई बार चाहकर भी पीएचसी की स्थिति ठीक नहीं करा पाता हूं।- डॉ. अनुज दीक्षित, सीएचसी प्रभारी, शिवराजपुर