पैसे नहीं मिले, जमीनें बेचने का काम शुरू हो गया था
साथ ही तुषार के सामने शर्त रखी कि समझौते के बाद वह अपने हिस्से की जमीन उनकी कंपनी को बेच दे। तुषार के मुताबिक इस जमीन के एक हिस्से का हस्तांतरण पूर्व में वीरेंद्र दुबे की कंपनी के हक में उसके चाचा विजय शंकर गुप्ता कर चुके थे, लेकिन उसमें तुषार के पिता को हिस्से की रकम नहीं दी गई। बकौल तुषार, वीरेंद्र ने पिता और चाचा के बीच एक धनराशि के तहत समझौता करा दिया। इसमें 25 लाख के चेक दिए गए और बाकी पैसा समझौता हो जाने के बाद देने की बात कही गई। हालांकि पैसे नहीं मिले, जबकि जमीनें बेचने का काम शुरू हो गया था।