कई बड़े संस्थानों के अफसरों ने दूरदराज इलाकों में फार्म हाउस, बंगले, फ्लैट आदि खरीद रखे
पांच सौ और हजार के नोट बंद करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान ने बेनामी संपत्ति खरीदने वालों की धड़कनें तेज कर दीं। दरअसल, प्रधानमंत्री ने गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि 30 दिसंबर के बाद बेनामी संपत्ति रखने वालों पर कार्रवाई होगी। इसके चलते अब कालेधन से संपत्ति बनाने वालों पर जांच की तलवार लटक गई है।
दो जुलाई को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने देश को संबोधित करते हुए आईडीएस के फायदों की जानकारी दी थी। कहा था कि ब्लैकमनी से खरीदी गईं बेनामी संपत्तियों को अपने नाम कराने का सुनहरा मौका है। इनकम डिस्क्लोजर स्कीम (आईडीएस) के जरिये महज 31 फीसदी टैक्स चुकाकर लोग संपत्तियों के कानूनी मालिक बन सकते हैं। संकेत साफ थे, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब सभी के होश उड़े हुए हैं। कानपुर में बेनामी संपत्तियों की बात करें तो इनका कोई प्रमाणिक लेखाजोखा तो नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि एक मंत्री ने नार्थ ईस्ट में संपत्ति खरीद रखी है। एक के गोवा और बंगलूरू में होटल हैं। कई बड़े संस्थानों के अफसरों ने दूरदराज इलाकों में फार्म हाउस, बंगले, फ्लैट आदि खरीद रखे हैं। कई ने बटाईदार के नाम पर खेती खरीद रखी है। बिठूर, मंधना, सरसौल, फतेहपुर, उन्नाव आदि जगहों में जमकर जमीनें खरीदी गई हैं।