बैठक में बोलते उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी।
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कानपुर। लगातार घटती छात्र संख्या से परेशान स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने स्नातक में सेमेस्टर प्रणाली को खत्म करने की मांग की है। प्रबंधकों ने कहा कि नई शिक्षा नीति बेहतर है लेकिन इसकी जगह वार्षिक परीक्षा प्रणाली फिर से लागू कर दी जाए तो यह छात्रों और महाविद्यालयों के लिए हितकर होगा। इससे छात्र संख्या में बढ़ोतरी होगी।
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के सदस्यों ने घटती छात्र संख्या की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को बैठक की। इसमें उन्होंने कहा कि बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड जैसे कोर्स में सेमेस्टर सिस्टम को खत्म किया जाए। साल में दो सेमेस्टर परीक्षाओं के होने से शिक्षकों का समय परीक्षा कराने और मूल्यांकन कराने में चला जाता है। इसकी जगह सतत मूल्यांकन हो और एक वार्षिक परीक्षा ली जाए जिससे बार बार लगने वाले समय की भी बचत हो सकेगी।
प्रबंधकों ने कहा कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में दाखिले की स्थिति बेहद खराब है। 90 फीसदी ऐसे महाविद्यालय हैं जिनमें 50 फीसदी से कम सीटें भरी हैं। सभी प्रबंधक परेशान हैं। बीए विभाग की स्थिति सर्वाधिक खराब है। प्रबंधकों ने वार्षिक परीक्षा के सुझाव से विवि प्रशासन को भी अवगत कराया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने कहा कि दो बार परीक्षा से छात्रों पर दोगुना शुल्क का बोझ बढ़ जाता है। वार्षिक परीक्षा प्रणाली कई मायनों में छात्रों को राहत देगी।