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कानपुर के अंकित बनाए गए यूनाइटेड नेशंस के दूत, दुनियाभर से 17 सर्वश्रेष्ठ युवाओं का चयन

Mon, 24 Sep 2018 07:11 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

-- आईआईटी कानपुर से शुरू की हेल्प अस ग्रीन नाम की स्टार्टअप कंपनी
-- कचरे में फेंके जाने वाले फूल, माला से तैयार करते हैं अगरबत्ती, धूपबत्ती, थर्माकोल
-- दुनियाभर से केवल 17 सर्वश्रेष्ठ युवाओं का हुआ है चयन, चौथे नंबर पर रहे 
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आईआईटी कानपुर से शुरू की हेल्प अस ग्रीन नाम की स्टार्टअप कंपनी
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विस्तार
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सोशल एंटरप्रिन्योर और हेल्प अस ग्रीन नाम से स्टार्टअप कंपनी चलाने वाले कानपुर के अंकित अग्रवाल को यूनाइटेड नेशंस (यूएन), न्यूयॉर्क ने अपना एंबेस्डर (दूत) बनाया है। सोमवार को अंकित ने यूनाइटेड नेशंस की जनरल एसेंबली में अपनी स्टार्टअप कंपनी का प्रजेंटेशन भी दिया। जिसे दुनियाभर के लोगों ने काफी सराहा। यूएन असेंबली में अंकित को यंग लीडर्स अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। अब अंकित यूएन एसेंबली के दूत के तौर पर 2019 तक काम करेंगे।
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इस दौरान वह दुनिया के अन्य सभी देशों में सोशल एंटरप्रिन्योरशिप का प्रचार-प्रसार करेंगे। अपनी स्टार्टअप कंपनी के जरिए अन्य देशों में स्वच्छता, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्रों में काम करेंगे। अंकित की स्टार्टअप कंपनी आईआईटी कानपुर में इंक्यूबेटेड (स्थापित) है। आईआईटी कानपुर के प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय हेल्पअस ग्रीन को तकनीकी गाइडेंस देते हैं। उन्होंने बताया कि यूएन एसेंबली द्वारा अंकित को एंबेस्डर बनाना कानपुर ही नहीं देश के लिए गौरव की बात है। हेल्पअस ग्रीन कंपनी ने एक साल के अंदर जो कारनामा कर दिखाया है वो शायद ही कोई और कर पाए। यह कंपनी बिजनेस बड़ा बनाने वाली नहीं है बल्कि समाज को फायदा पहुंचाने वाली है। अंकित ने इस बात का जिक्र भी यूएन की एसेंबली में किया है। अंकित की सफलता पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे स्टार्टअप की जरूरत है जिससे पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सके और लोगों के लिए रोजगार का सृजन भी हो। 
यूनाइडेट नेशंस में यंग लीडर और एंबेसडर बनने के लिए 184 देशों के 8,046 युवाओं ने आवेदन किया था जो अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसमें केवल 17 युवाओं का चयन हुआ है। अंकित का नाम इस सूची में चौथे नंबर पर है। इस बार का विषय सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स तय किया गया है। इसी क्षेत्र में चयनित सभी 17 लीडर्स दुनियाभर में काम करेंगे। 
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मंदिरों से उठाते हैं फूल, तैयार करते हैं कई उत्पाद
अंकित बताते हैं कि उनकी टीम शहर के सभी मंदिरों से चढ़ाए जाने वाले लगभग दो हजार किलो फूल और नारियलों को एकत्रित करती है। इसके बाद उन्हें सुखाया जाता है और फिर इनको पीसकर एक विशेष प्रकार की इको फ्रेंडली अगरबत्ती, धूपबत्ती और थर्माकोल तैयार किया जाता है। इसके लिए आईआईटी कानपुर के सिडबी इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर और टाटा ट्रस्ट सोशल अल्फा ने अनुदान भी दिया है।
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ये भी है खास उपलब्धि

कचरे में फेंके जाने वाले फूल, माला से तैयार करते हैं अगरबत्ती, धूपबत्ती, थर्माकोल
- स्टार्टअप कंपनी को फोर्ब्स इंडिया टॉप-30 की सूची में शामिल किया गया है।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले 27 जनवरी को कंपनी की काफी तारीफ की थी।
- अभी तक 11060 मेट्रीक टन मंदिर से निकलने वाले फूल, माला से उत्पाद तैयार कर चुके हैं।
- मंदिरों से प्रतिदिन 8.4 टन फूलों को एकत्रित करते हैं।
- इसी माह हेल्प अस ग्रीन स्टार्टअप कंपनी को बिल एंड मिलिंडा गेट्स  फाउंडेशन की तरफ से गोल कीपर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जाएगा।
- दिसंबर में पोलैंड में होने वाले कॉप-26 समिट में भी अंकित को मोमेंटम चेंज अचॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। 
 
मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद शुरू की कंपनी
हेल्पअस ग्रीन स्टार्टअप कंपनी को चलाने वाले अंकित अग्रवाल, करण रस्तोगी ने मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद नौकरी की बजाय स्टार्टअप कंपनी शुरू की है। अंकित ने पुणे के रीजनल कॉलेज से बीटेक व सिंबोयसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट से इनोवेश में मास्टर की डिग्री हासिल की है। करण रस्तोगी ने वोरिक बिजनेस स्कूल, इंग्लैंड से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद मिलकर कंपनी शुरू की। अंकित बताते हैं कि 2014 में चेक रिपब्लिक देश में रहने वाले उनके एक मित्र जाकूब ब्लाहा कानपुर आए हुए थे। यहां वे दोनों गंगा किनारे बैठे थे। जाकूब ने गंगा में फूल-मलाएं और नारियलों के टुकड़े देखकर कुछ तैयार करने का आइडिया दिया। जिसके बाद अंकित और उनके साथियों ने मिलकर इस काम को शुरू किया। 
 
नौ हजार महिलाओं को दे चुके हैं रोजगार
अंकित बताते हैं कि हेल्पअस ग्रीन कंपनी में 80 प्रतिशत महिलाएं ही काम करती हैं। अभी तक उन्होंने इसके जरिए शहर के नौ हजार महिलाओं को काम दिया है। यह अच्छा अवसर है कि महिलाएं घर के कामकाज के साथ आसानी से इसमें अपनी सहभागिता भी दे देती हैं और उन्हें इसके लिए अच्छी खासी रकम मिलती है।
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