कानपुर। चिड़ियाघर के दो डॉक्टर्स और 46 कर्मचारी भी जानवरों की बीमारी की चपेट में आ गए हैं। ब्लड सैंपल की जांच से इन सभी लोगों में लैप्टो-स्पाई-रोसेस और ब्रुसेला नामक बीमारी होने की पुष्टि हुई है। इसकी जानकारी होते ही डॉक्टरों और कर्मचारियों का इलाज शुरू हो गया है। इस घातक बीमारियों से बचाव के लिए एहतियातन जू में सभी कैट फैमिली के जानवरों में 14 दिन का ट्रीटमेंट कोर्स चालू कर दिया। निदेशक मुकेश कुमार ने कहा कि दर्शकों को घबराने की जरूरत नहीं है, समय पर ही सभी कर्मचारियों और डॉक्टरों का ट्रीटमेंट शुरू हो गया है। जानवरों को भी दवाई दी जा रही है।
चिड़ियाघर में लैप्टो-स्पाई-रोसेस, ब्रुसेला बैक्टीरिया ने फिर से धावा बोला है, यह वही बीमारी है जो कुछ समय पहले बब्बर शेरनी ‘लक्ष्मी’ को हुई थी। उस समय तो यह ठीक हो गई थी लेकिन बाद में इटावा में उसकी कैनाइन डिस्टेंपर (कुत्तों की वजह से होने वाली बीमारी) से मौत हो गई थी। जू में बीमारी के शुरुआती लक्षण जैसे जुकाम, बुखार, बदन दर्द एक के बाद एक करके सभी कर्मचारियों और डॉक्टर्स में दिखाई देने लगे तो जू प्रशासन सतर्क हुआ। जू निदेशक ने सभी कर्मचारियों और डॉक्टरों की खून की जांच कराने के निर्देश दिए। सात अप्रैल को आई ब्लड रिपोर्ट में 48 कर्मचारियों में बीमारी के लक्षण पाए गए। इनमें से 21 कर्मचारियों को ब्रुसेला 10 को लैप्टो-स्पाई-रोसेस और 17 कर्मचारी दोनों बीमारी से ग्रसित हैं। जू के डॉक्टर आरके सिंह और डॉ यूसी श्रीवास्तव को लैप्टो-स्पाई-रोसेस है। रिपोर्ट आते ही जू निदेशक के निर्देश पर बीमारी से निपटने के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों का 45 दिन का कोर्स शुरू हो गया है। इसके अलावा कैट फैमिली के जानवरों के लिए भी ट्रीटमेंट कोर्स शुरू किया गया है।
स्टाफ के अलावा जानवरों का भी ब्लड टेस्ट कराया गया था। 48 स्टाफ मेंबर्स और डॉक्टर बीमारियों की चपेट में हैं। सभी को ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।
जू डॉक्टर यूसी श्रीवास्तव
जू में ऐसे आई बीमारी
जू में बह रहे गंदे नाले की वजह से लैप्टो-स्पाई-रोसेस और ब्रूसेला बैक्टीरिया कानपुर जू में पहुंचे थे और बब्बर शेरनी लक्ष्मी को बीमार कर दिया था, हालांकि कुछ समय ट्रीटमेंट के बाद लक्ष्मी ठीक हो गई थी। उस समय भी डॉक्टर और कुछ कर्मचारी इसकी चपेट में आए थे। उनका भी इलाज चला था और वह ठीक हो गए थे। नाला तो बंद कर दिया है। लेकिन एक बार फिर ये बीमारी उभर कर सामने आ गई है। डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं कि गंदे पानी, चूहे, छछूंदर, गिलहरी के काटने के अलावा इस बीमारी से ग्रसित जानवर के यूरिन के संपर्क में आने पर यह बैक्टीरिया जानवरों या इंसानों में पहुंचता है। वहीं ब्रुसेला घातक बीमारी है। इसके बैक्टीरिया शरीर के भीतर कहीं पर भी पहुंच सकते है और गांठें बनाते हैं। ये स्किन और ब्रेन पर भी असर करती है। लैप्टो-स्पाई-रोसस बैक्टीरिया किडनी और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसमें आदमी की मौत तक हो सकती है।
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दर्शक घबराएं नहीं जू में व्यापक इंतजाम
खबर लिखने का मकसद केवल जानकारी देना है दर्शकों के मन में दहशत या डर फैलाना नहीं है। जू में दर्शकों की सुविधाओं के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए है। मसलन पूरे जू में आरओ ट्रीटेड पानी की सप्लाई होती है। बीमार कर्मचारियों का इलाज शुरू हो गया है। इलाज शुरू होने के साथ ही उनके बैक्टीरिया दूसरों को फैलने के चांस कम हो जाते हैं। नाला पहले से बंद है, इसकी वजह से झील के पानी में बैक्टीरिया की संख्या में कमी आई है।
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बरतें एहतियात...
अस्वस्थ, जुकाम से पीड़ित दर्शक जू में न जाएं।
बहुत छोटे बच्चों को जू में लेकर न जाएं।
कीचड़, मिट्टी से सने जानवर से दूर रहें।