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Kanpur News: भारतीय महिला बेवजह पति को छोड़ पिता के घर नहीं रहती

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कानपुर।
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भारतीय महिला शादी के बाद ससुराल को ही अपना घर समझती है। बेवजह पति का घर छोड़ पिता के घर नहीं रहती। पत्नी को साथ न रखना और उसे वापस बुलाने की कोशिश न करना भी क्रूरता है।

इसी टिप्पणी के साथ पारिवारिक न्यायालय द्वितीय के अपर प्रधान न्यायाधीश राकेश त्रिपाठी ने पत्नी व बच्चे के भरण-पोषण के लिए कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह मुकदमा दाखिल करने की तिथि से भुगतान करने के आदेश पति को दिए हैं।
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हर्षनगर के इंद्रप्रस्थ अपार्टमेंट में रहने वाले युवक की शादी जाजमऊ पुराना गौशाला निवासी युवती से 11 जून 2019 को हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन दहेज में लग्जरी कार की मांग को लेकर युवती को प्रताड़ित करते थे।

29 अगस्त 2020 को एक पुत्र का भी जन्म हुआ। जनवरी 2021 में विवाद इतना बढ़ा कि पति-पत्नी अलग रहने लगे। पत्नी ने अगस्त 2021 में ससुरालीजनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा भी दर्ज कराया था।

इसके बाद घरेलू हिंसा और भरण-पोषण भत्ता के लिए भी मुकदमा दाखिल किया था। अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि पत्नी ने खाने में नींद की गोली देकर जान लेने, दूसरी बार गर्भवती होने पर गर्भपात कराने व पति के अनैतिक संबंध होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

वहीं, पति की ओर से दाखिल जवाब में लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया गया था। उसने कहा कि पत्नी आधुनिक युवती है और मनमानी करती है। बेटे से मिलने की कोशिश कीतो मिलने नहीं दिया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पति पर पत्नी और बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी होने का तर्क रखते हुए पत्नी को 15 हजार रुपये और बच्चे को पांच हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता देने के निर्देश पति को दे दिए।




पति कपड़े का थोक व्यापारी, वेबसाइट से करोड़ों का टर्नओवर

अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि पति का करोड़ों रुपये का सालाना टर्न ओवर है। इंडिया मार्ट वेबसाइट के माध्यम से कपड़े का थोक व्यापार करता है। काहूकोठी में कपड़े का थोक व्यापार है।

प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी है जबकि पति ने पिता की दुकान में खुद को वैतनिक कर्मचारी बताया था और मात्र 15-20 हजार रुपये वेतन मिलने की बात कही थी। कोर्ट में तर्क रखा गया कि पति अपने पिता का एकलौता बेटा है और दुकान का नाम मां के नाम पर है और वेबसाइट में बेटे ने खुद को संचालक दर्शाया है।

नौ लाख रुपये का करना होगा भुगतान
अधिवक्ता ने बताया कि मुकदमा अगस्त 2021 में दाखिल किया गया था। कोर्ट ने दाखिले की तारीख से भत्ते का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह अब तक नौ लाख रुपये से ज्यादा का बकाया पति पर हो गया है।
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इसके साथ 20 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान देना है। हालांकि इसमें अंतरिम भरण-पोषण भत्ते की धनराशि समायोजित होगी। लगभग नौ लाख रुपये पति को भुगतान करना होगा।
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