फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक घंटे बाद पुलिस आई, डेढ़ घंटे बाद गोताखोर

Thu, 23 Jun 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
विज्ञापन
गोताखोरों ने मशक्कत से खोजे शव। - फोटो : amarujala
विज्ञापन
कानपुर। पुलिस-प्रशासन की लापरवाही से गंगा बैराज के डेथ प्वाइंट पर मौतों का सिलसिला जारी है। यहां डेढ़ महीने में 13 मौतें हो चुकी हैं। 8 मई को तीन इंजनियरिंग छात्र यहीं डूबे थे। 27 मई को दो लोग डूबे और हाल ही में 18 जून को डेथ प्वाइंट पर सैफ डूबा। ऐसा नहीं है कि पुलिस- प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। 8 मई को तीन इंजीनियरिंग छात्रों की डूबने से मौत के बाद ‘अमर उजाला’ ने प्रशासन की आंखें खोलने के लिए अभियान चलाया। सवाल उठाया कि आखिर गंगा बैराज के खतरनाक हिस्सों में लोगों का जाना क्यों नहीं रोका जाता। क्यों नहीं रेलिंग लगा दी जाती। इसके बाद एसएसपी ने डीएम को बैराज पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय करने के लिए पत्र लिखा। डीएम ने नगर निगम को पत्र लिख दिया लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया। पत्र-पत्र खेलकर बैठ गए। एक-दो दिन तक वहां पुलिस तैनात रही और लोगों को डेथ प्वाइंट की ओर जाने से रोकती रही। दो दिन बाद सब कुछ पहले जैसे हो गया। अगर पुलिस-प्रशासन चेत जाता तो शायद सात युवाओं की जानें बच जातीं।
विज्ञापन

11 बजे ही दे दी थी पुलिस को सूचना
गंगा बैराज पर सात युवकों के डूबने की सूचना 11 बजे कंट्रोल रूम को दी गई लेकिन पुलिस एक घंटे बाद पहुंची। डूबते लोगों को बचाने का कोई प्लान पुलिस के पास न था, न है और न होगा। इसलिए पुलिस, जलपुलिस को सूचना देकर बैठ गई। एक गाड़ी शुक्लागंज भेजकर गोताखोर बुलवाए गए, ये सब करने में आधा घंटा और लग गया। साढ़े 11 बज गए। युवकों के डूबने के डेढ़ घंटे बाद बचाव कार्य शुरू हो सका। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस-प्रशासन कितना मुस्तैद था।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें