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कानपुर के स्टार्टअप ‘फूल’ को आईएएन फंड और सैन फ्रांसिस्को के फाउंडेशन ने दी 10.40 करोड़ की मदद

Fri, 28 Aug 2020 11:38 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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अंकित अग्रवाल - फोटो : amar ujala
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मंदिर में चढ़े फूलों से धूप बत्ती बनाने वाले अंकित अग्रवाल के स्टार्टअप ‘फूल’ को आईएएन फंड (स्टार्टअप को फंड देने वाली संस्था) और सैन फ्रांसिस्को के ड्रेपर रिचर्ड्स कपलान फाउंडेशन ने मिलकर 1.4 मिलियन डॉलर (करीब 10.40 करोड़ रुपये) की मदद दी है।
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‘फूल’ यूपी का ऐसा पहला स्टार्टअप है, जिसे इतनी बड़ी मदद मिली है। अंकित कहते हैं कि शोध एवं विकास के कामों में यह राशि बहुत काम आएगी। किदवईनगर निवासी अंकित इस स्टार्टअप के तहत मंदिरों से निकलने वाले बेकार फूलों का उपयोग कर बिना कार्बन वाली अगरबत्ती व चारकोल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि

फूल से चमड़ा बनाना भी शुरू कर दिया है। इसे फ्लेदर नाम दिया है। जानवरों की खाल का विकल्प तैयार कार अंकित फ्लेदर से जूते, बेल्ट आदि बनवा रहे हैं। इस शोध पर पेटा ने सर्वश्रेष्ठ नवाचार वेगन वर्ल्ड से सम्मानित भी किया था। उनका स्टार्टअप आईआईटी कानपुर से सहायता प्राप्त है और कई प्रतिष्ठित अवार्ड भी जीत चुका है।
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अंकित के नाम उपलब्धियां
उनका नाम फोर्ब्स की सूची में भी रहा है। संयुक्त राष्ट्र यंग लीडर्स अवार्ड, यूनाइटेड नेशंस मोमेंटम ऑफ चेंज अवार्ड, एशिया सस्टेनेबिलिटी अवार्ड, एलक्विटी ट्रांसफॉर्मिंग लाइव्स अवार्ड, ब्रेकिंग द वॉल ऑफ साइंस अवार्ड भी इन्हें मिले चुके हैं। लॉकडाउन में धार्मिक स्थलों के बंद होने से फूलों की खेती करने वाले किसानों की हालत खराब थी। अंकित ने ऐसे किसानों से संपर्क कर उन से सीधे फूलों की खरीदारी की। इससे किसानों को खासी राहत मिली।

14 लाख का पैकेज छोड़ शुरू किया था स्टार्टअप
आईआईटी कानपुर इंक्यूबटेड स्टार्टअप फूल के फाउंडर अंकित अग्रवाल ने अपने सपने को पूरा करने के लिए 14 लाख की नौकरी छोड़ दी थी। 2016 में शुरू हुए इस स्टार्टअप की शुरुआत मात्र दो लोगों से हुई थी। चार साल में अंकित 123 लोगों को नौकरी दे चुके हैं। उनका काम कानपुर के अलावा तिरुपति में भी चल रहा है।

ऐसे आया आइडिया
अंकित ने बताया कि चेक गणराज्य से उनका एक दोस्त कानपुर घूमने आया था। वह उसे गंगा किनारे ले गया। लोग मंदिर से निकलने वाले बेकार फूल गंगा में फेंक रहे थे। यह देख दोस्त को बहुत बुरा लगा। तभी से उन्होंने इसका उपाय तलाशना शुरू कर दिया।
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