कभी मल्टीनेशनल कंपनियों में प्रतिभा का लोहा मनवा चुके पिहानी कस्बा निवासी अम्मार जैदी अब प्रगतिशील किसान हैं। पिछले साल उन्होंने पराली का इस्तेमाल अपने खेतों में खाद बनाने के लिए शुरू किया था।
पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना होने लगा, तो उन्होंने किसानों को इसके प्रति जागरूक किया। अम्मार रविवार दोपहर 12 बजे से अपने खेतों से ही अमर उजाला के फेसबुक पेज पर लाइव होंगे। वह किसानों को पराली प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
अम्मार जैदी ने हाईस्कूल की पढ़ाई पिहानी के हामिद अली इंटर कालेज से की थी। इंटर लखनऊ के शिया कॉलेज और स्नातक लखनऊ विश्वविद्यालय से किया। इसके बाद यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग और मानव संसाधन विषय से एमबीए किया।
कैंपस सेलेक्शन में उन्हें इंडिया बुल्स कंपनी में नौकरी मिली। इसके बाद रिलायंस कैपिटल, वेल्थ मैनेजमेंट कार्पोरेट्स के अलावा कई बैंकों में काम किया। 2014 में आईसीआईसीआई बैंक में प्रबंधक के पद से इस्तीफा दे दिया और पैतृक आवास पिहानी आ गए।
यहां उन्होंने खेती के क्षेत्र में हाथ आजमाना शुरू किया। अब पूरे इलाके में नए-नए प्रयोगों के लिए अम्मार चर्चित हैं। किसान संबंधी कई कार्यक्रमों में बतौर पैनलिस्ट शामिल रह चुके अम्मार 30 एकड़ क्षेत्रफल में खेती करते हैं।
अम्मार कहते हैं कि वर्ष 2014 से ही खेतों में काम करने लगे थे। तब से आज तक कभी भी पराली नहीं जलाई। पराली को खेत में ही पड़े रहने देने और सड़ जाने देने से जैविक खाद बन जाती है और इससे खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।