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Kanpur News: आठ मोबाइल नंबरों से 1181 बार बुलाई एंबुलेंस

Sun, 03 May 2026 01:58 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। जनपद में एंबुलेंस के फेरों की जांच के बाद गड़बड़ी का दायरा बढ़ता जा रहा है। एंबुलेंस के फेरे लगाने की जांच में जिस तरह अनियमितताएं सामने आईं है वह जांच अधिकारियों के गले नहीं उतर रहीं। देवीपुर सीएचसी से आठ मोबाइल नंबरों से 1181 बार सेवा लेने की बात बड़ी अनियमितता की ओर इशारा कर रही है। ये गड़बड़ी कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग के सत्यापन पर भी सवाल खड़ा कर रही है।
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स्वास्थ्य विभाग हर माह एंबुलेंस से लगाए गए फेरों का सत्यापन कराने का दावा करता रहा। सत्यापन के बाद भी इतनी बड़ी चूक कैसे हुई ये समझना बेहद मुश्किल है। इतना ही नहीं कई अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की जांच में मिली खामी और पीसीआर में दर्ज नंबर बंद होना भी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी निदेशालय की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होने की बात कह रहे हैं।
एंबुलेंस के फेरों में गड़बड़ी की शिकायत पर जिलाधिकारी ने एसडीएम, स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की संयुक्त टीम बनाई थी। टीम ने जांच शुरू की तो हकीकत सामने आ गई। एसडीएम भोगनीपुर, चिकित्साधिकारी राजपुर ने देवीपुर सीएचसी में अक्तूबर, नवंबर 2025 में लगाए गए फेरों की जांच की। जांच टीम ने पाया कि आठ मोबाइल नंबरों से कॉल कर दो एंबुलेंस से 1181 बार सेवा ली गई। जांच अधिकारियों को यह बात गले नहीं उतर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में फेरे कैसे लगाए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि एंबुलेंस बुलाने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर तो एक ही रहा लेकिन हर बार एंबुलेंस बुलाने का स्थान बदल दिया गया। मोबाइल नंबरों के अनुसार जिन लाभार्थियों का विवरण दर्ज किया गया। उनके गांव अलग-अलग थे और व्यक्ति भी अलग-अलग थे। यह स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।
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इसी तरह पुखरायां सीएचसी में सितंबर 2025 में लगाए फेरों की जांच में सामने आया कि छह मोबाइल नंबरों से 85 बार सेवा ली गई। इससे भी जांच अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। टीम ने माना कि एक माह में कोई व्यक्ति तीन से चार बार सेवा ले सकता है लेकिन छह नंबरों से 85 बार सेवा लेना अनियमितता है। इस तरह अलग-अलग टीमों ने गहनता से जांच की तो कई जगह पीसीआर में दर्ज मोबाइल नंबरों पर बात ही नहीं हो सकी। रूरा सीएचसी में 34 फेरों का सत्यापन नहीं हो सका। रूरा के सत्यापन में 16 नंबर बंद पाए गए जबकि 27 लोगों ने फोन नहीं उठाया। अमरौधा में 52 लाभार्थियों का फोन बंद पाया गया।
अधिकारियों की जांच यह दर्शाती है कि एंबुलेंस का उपयोग वास्तविक मरीजों के लिए नहीं बल्कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जा रहा था। इस तरह मिली गड़बड़ी के बाद भले ही स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिकी दर्ज करा दी हो लेकिन सवाल है कि यह गड़बड़ी विभागीय सत्यापन में पकड़ में क्यों नहीं आई। इस पर सीएमओ डॉ. एके सिंह का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज हो गई है। पुलिस अपने स्तर से जांच करेंगी। वहीं 102, 108 एंबुलेंस सेवा की हुई जांच की रिपोर्ट निदेशालय भेजी गई है, वहां से भी रिकार्ड का मिलान कराया जाएगा, इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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अब बचते नजर आ रहे जिम्मेदार
एंबुलेंस सेवाओं की जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है। अधिकारी भी एक दूसरे पर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। एंबुलेंस के सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि उनके संचालन में पारदर्शिता का अभाव है। यही वजह रही कि गड़बड़ी विभागीय स्तर पर पकड़ में नहीं आई। अब जब जिलाधिकारी ने कार्रवाई के आदेश दिए तो जिम्मेदार अपनी गर्दन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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