बांदा में स्वास्थ्य महकमे की लचर से लेकर लाचार व्यवस्था के दंश ने एक विवाहिता से उसका सुहाग और छह बच्चों से पिता का साया छीन लिया। बजट के अभाव में डीजल न मिलने से एंबुलेंस खड़ी रही। शर्मसार करने वाला यह वाकया शहर मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर डिंगवाही गांव का है।
परिजनों का कहना है कि 108 और 102 पर बार-बार कॉल करने पर कहा गया कि एंबुलेंस खाली नहीं है। फिर कहा गया कि डीजल न मिलने से एंबुलेंस नही चल सकेगी। डिंगवाही गांव निवासी बंदर (40) पुत्र बैजनाथ को सप्ताह भर से बुखार आ रहा था। बुधवार की रात सात बजे घर में हालत बिगड़ गई।
लचर व्यवस्था ने छीन लिया छह बच्चों के सिर से बाप का साया
पड़ोसी चंद्रप्रकाश और सिकंदर ने अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 और 102 एंबुलेंस पर कॉल की, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। बंदर घर में ही तड़पता रहा और कुछ देर बाद मौत हो गई। पत्नी नकुलिया ने कहा कि समय पर इलाज मिल जाता तो पति की जान बच सकती थी।
अफसरों से शिकायत करेंगी। मृतक मजदूरी करता था। उसके छह बच्चे हैं। पड़ोसी चंद्रप्रकाश और सिकंदर ने बताया कि उन लोगों ने सात बजे से लेकर नौ बजे तक 108 व 102 एंबुलेंस पर कई बार फोन किया। हर बार अलग-अलग जवाब मिलता रहा।
एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम प्रबंधक ने बताई बैंकिंग गड़बड़ी
कभी बताया कि मटौंध में फंसे हैं, समय लगेगा। फिर एंबुलेंस खाली न होना और डीजल न होने पर एंबुलेंस न चलने के जवाब दिए गए। जब इन आरोपों की पड़ताल की गई तो पता लगा कि बजट के अभाव में डीजल न होने से छह एंबुलेंस खड़ी हो गई हैं।
108 व 102 एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम प्रबंधक अश्वनी प्रजापति ने भी बताया कि बैंकिंग गड़बड़ी की वजह से फ्यूल टैरिफ कार्ड में बजट नहीं आ सका। छुट्टियों की वजह से डीजल के लिए निर्धारित बजट नहीं मिला। जब स्वीकृत हुआ तो बैंकिंग गड़बड़ी ने समस्या और बढ़ा दी। लगभग छह एंबुलेंस डीजल के बिना खड़ी हो गईं थीं।