प्रदूषण के तत्व रोगी के शरीर में एलर्जी बढ़ा रहे हैं। इससे लोगों की खांसी दो-तीन महीने में भी ठीक नहीं हो रही है। नाक, गले के बाद ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों में संक्रमण उतर रहा है। खांसी की समस्या से जूझ रहे पांच सौ रोगियों के एलर्जी टेस्ट में यह पता चला है। ईएनटी फाउंडेशन ने ऐसे पांच सौ रोगियों की केस स्टडी तैयार की है। एलर्जी से रोगियों को मानसिक तनाव हो रहा है। मस्तिष्क की वीगस नर्व सक्रिय होने से खांसी की जटिलता और बढ़ जाती है।
फाउंडेशन के निदेशक डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया कि धूल-धुआं और विभिन्न फूलों के परागकण से एलर्जी होती है। इसके साथ ही फलों, सब्जियों आदि में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी दिक्कत करते हैं। एलर्जी रोगी की नाक से गले में बढ़ती है। इसके बाद सांस की नली से फेफड़ों में आ जाती है। इससे रोगियों को खांसी बहुत लंबे समय तक चलती है। कुछ रोगियों की खांसी में खून भी आ सकती है। डायबिटीज, बीपी समेत जिन रोगों से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें दिक्कत अधिक हो रही है।