गंगा को स्वच्छ करने में कें द्र सरकार के प्रोजेक्टों को पूरा करने में जमकर लापरवाही बरती गई है। यह खुलासा एनजीटी की हाई पावर कमेटी की दो दिन की पड़ताल से हुआ है। कमेटी ने शनिवार को निरीक्षण के बाद बैठक में इस बात पर चर्चा की। कहा कि जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण इकाई, सिंचाई विभाग, नगर निगम, केस्को, इन सभी विभागों में आपस में कोई तालमेल नहीं है। यही वजह है कि बिना ट्रीटमेंट किए सीवर का कचरा सीधे गंगा में जा रहा है जबकि इसकी रोकथाम के लिए अब तक कें द्र सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर चुकी है।
कमेटी ने सुबह सनिगवां में तैयार किए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को देखकर नाराजगी जताई। कमेटी का कहना है कि अब तक इस प्लांट से काम शुरू हो जाना था। अभी टेस्टिंग ही चल रही है। टीम ने सजारी में बने दूसरे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को भी देखा। कमेटी ने गंगा बैराज की तरफ जाकर भी नदी के बहाव को देखा। कमेटी के प्रमुख विशेषज्ञ प्रो एए काजमी ने कहा कि विभागों में आपस में समन्वय की कमी और काम धीमी गति से होने से दिक्कत आ रही है। यदि ऐसे चलता रहा तो गंगा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती चली जाएगी। सरकार की तरफ से किया-धरा सब बेकार जाएगा। प्रो काजमी के अनुसार पड़ताल की एक रिपोर्ट कमेटी तैयार करेगी, जिसे आठ मार्च से पहले एनजीटी को सौंपी जाएगी।