इसके साथ ही ग्रिल वाली खिड़कियों को हटाकर पलड़े वाली लगाई जाएंगी। इससे किसी आपात स्थिति में खिड़की से बच्चों को निकाला जा सके। डॉ. काला ने बताया कि एसएनसीयू में एक और दरवाजा लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऑक्सीजन के प्वाइंट के नियमित जांच की व्यवस्था कर दी गई है। इसके साथ ही एसएनसीयू, पीआईसीयू और आईसीयू में प्लास्टिक का सामान न रखने के लिए कहा गया। ऐसे सामान से जल्दी आग पकड़ सकती है। पीआईसीयू में जांच के दौरान पाइप कनेक्शन टूटा मिला। यहां हॉर्स पाइप लगाने के लिए कहा गया, जिससे तेज प्रेशर से पानी ऊपर पहुंचाया जा सके।
बैटरी लाइट की व्यवस्था करने के लिए कहा
मेटरनिटी विंग में संचालित पीआईसीयू में रैंप नहीं बनाया गया है। यहां से उतरने का रास्ता सीढ़ियां ही हैं। यहां कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग कार्य करा रहा है। प्राचार्य डॉ. काला ने कहा कि कार्यदायी संस्था ने रैंप पीआईसीयू तक नहीं बनाया। इसे सौ बेड वाले आईसीयू से एलिवेटेड मार्ग बनाकर जोड़ जाएगा। इसके साथ ही बैटरी लाइट की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। इससे आग लगने पर जब बिजली काटी जाती है, तो वार्ड में अंधेरा नहीं रहेगा। इस मौके पर हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह, डॉ. अनुराग राजौरिया, बालरोग अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनय, फायर सेफ्टी के नोडल अधिकारी डॉ. एसके गौतम आदि रहे।
एनआईसीयू के लिए अलग से कोई फायर सेफ्टी व्यवस्था नहीं होती, जो अस्पताल के लिए होती है…वही एनआईसीयू के लिए भी होती है। एक पानी का टैंक होना चाहिए, फायर पंप होना चाहिए। एक प्रवेश द्वार और बाहर निकलने के लिए एक दरवाजा हो। -दीपक शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी