सूबे के मुखिया सीएम अखिलेश यादव ने बुधवार को फतेहपुर में दो जनसभाएं कीं। एक बिंदकी में तो दूसरी शहर में। विकास और वायदे के बीच सपा युवाओं के जोश को सीएम ने जिस अंदाज में बयां किया, वह बात दूर तलक निकल गई। भीड़ में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यह किस चीज का संकेत है। संरक्षक की भूमिका में जा पहुंचे सपा मुखिया मुलायम सिंह के लिए या फिर गठबंधन कितनी दूर तक जाएगा उसे लेकर। आदि-आदि। बहरहाल सीएम के संबोधन को हवा तो मिल ही गई है।
आइए बताते हैं आखिर सीएम अखिलेश यादव ने ऐसा क्या कह दिया, जिस पर भीड़ ही मंथन करने लगी। सीएम ने भीड़ और मंच पर मौजूद युवाओं की ओर हाथ उठाते हुए कहा कि अरे, हमारे यह समाजवादी युवा तो ऐसे हैं, जो हैंडल छोड़कर भी साइकिल को रफ्तार से पैडल मारते हुए चला लेते हैं। हैंडल छूटने की बात का संकेत निकाला जाने लगा, तभी सीएम बोल पड़े, ऐसे में साइकिल को अब हाथ का साथ मिल गया है, तो सोचो रफ्तार कितनी तेज हो जाएगी।
यही नहीं सीएम इतने पर ही नहीं रुके। गठबंधन पर बोले कि लोग कहते हैं यह दो कुनबों का गठबंधन है। नहीं भाई, मैं कहता हूं यह दो युवा नेताओं की सोच व उनके काम के जज्बे का गठबंधन है। दुनियां कहां की कहां पहुंच रही और हम.....यह सब युवा नेता न मिलने से हुई है। अब यही युवा गठबंधन प्रदेश और देश में बोलेगा। सीएम के इस वाक्य ने भी जो संकेत दिया उस सोच के पोस्टर भी परिसर में एक प्रत्याशी की ओर से लगे देखे गए। इस पोस्टर में एक साइड राहुल और अखिलेश फोटो सहित थे। उसी के ठीक ऊपर संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बगल में सोनिया गांधी।
इस युवा सोच और युवा गठबंधन में कांग्रेस की मेन धुरी रही सोनिया के भी संरक्षक की भूमिका लगभग तैयार नजर आती दिखी। बहरहाल गठबंधन में एक हुई सपा और कांग्रेस की नीति व नीयत कितनी दूर तक साथ चलेगी यह तो चुनाव परिणाम और उसके बाद की स्थितियां बताएंगी। फिलहाल सीएम के संबोधन ने दो युवा सोच और बिना हैंडल साइकिल भागने को तेजी से हवा दे दी है।