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हार के बाद क्या अब पिता से किए इस वादे काे निभाएंगे अखिलेश !

Sat, 11 Mar 2017 03:26 PM IST
हिमांशु मिश्र, टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अखिलेश यादव व शिवपाल सिंह यादव
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किलें तेजी से बढ़ती दिख रही हैं। अपनी पहली सबसे बड़ी राजनीतिक हार से रूबरू हो रहे अखिलेश के लिए संगठन अाैर अपने परिवार को बनाए रखने की बड़ी चुनाैति है। राजनीतिक पंडिताें का अाकलन है कि अब अखिलेश अध्यक्ष पद छाेड़ सकते हैं। 
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माना जा रहा है कि अब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को भी विरोधी पक्ष अपने हमले की जद में लेगा। इसका अहम कारण अखिलेश के ही उस बयान को बनाए जाने की तैयारी है, जिसमें उन्होंने मुलायम सिंह यादव से कहा था कि बस तीन महीने हमें दे दीजिए, उसके बाद आप जो चाहे कीजिए। वर्चस्व की जंग में अहम हथियार बनेगा 'बड़ों का अपमान' परिवार में वर्चस्व की जंग में अखिलेश का विरोधी खेमा लगातार इस बात पर जोर देता रहा है, कि मुलायम सिंह यादव के साथ जो हुआ वह गलत था. अखिलेश ने मुलायम का अपमान किया. उन्होंने मुलायम के साथ ही शिवपाल व अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने की भारी गलती की। ये वे लोग थे, जिन्होंने पार्टी को एक-एक ईंट जोड़कर खड़ा किया था। इनकी संगठन में अच्छी खासी पकड़ थी।
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परिणाम आने के दो दिन पहले ही मुलायम की पत्नी और अखिलेश की सौतेली मां साधना यादव कहा था कि किसी को भरोसा नहीं था कि अखिलेश बागी हो जाएगा। जिस तरह से मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव का अपमान किया गया, वह नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा था कि मुझ पर कई झूठे आरोप लगाए गए, जो अब मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी। वहीं शिवपाल सिंह यादव ने चुनाव परिणाम आने के दौरान ही अखिलेश पर वार करते हुए कहा कि ये समाजवादियों की नहीं, घमंड की हार है. नेताजी को हटाया गया और हमारा अपमान किया गया। विरोधी खेमे ने की चुन-चुन के बदले लेने की तैयारी इसके अलावा अखिलेश यादव के सामने पार्टी में टूट बचाने और संगठन को खड़ा करने की भी चुनौती आ खड़ी हुई है। शिवपाल के करीबियाें ने ताे अब एक बार फिर से अखिलेश से उनकी सत्ता वापस लेने का पूरा खाका तैयार कर लिया है।  इसमें अखिलेश पर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जाएगा, साथ ही संगठन में पिछले दो महीने में किए गए बड़े बदलावों को वापस लिया जाएगा। यही नहीं टीम के अखिलेश के अहम सदस्यों पर भी विरोधी खेमे की नजर टेढ़ी दिखाई दे रही है।
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