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आईटीएमएस: चौराहा-तिराहा सुधार की रिपोर्ट तैयार

Tue, 23 Aug 2016 01:12 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला कानपुर
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trafic - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर। इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) डेवलप कर रही ओनिक्स इलेक्ट्रानिक्स कंपनी ने सभी 75 चौराहों-तिराहों की रिपोर्ट तैयार कर ली है। कंपनी ने सोमवार को केडीए अधिकारियों को यह रिपोर्ट सौंपी। केडीए चीफ इंजीनियर ने इस रिपोर्ट को एडीएम सिटी को भेज दिया है। साथ ही आईटीएमएस के लिए बनी कमेटी की बैठक बुलाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। बैठक में पीडब्ल्यूडी, केडीए और जिला प्रशासन के अधिकारी रिपोर्ट पर फैसला लेंगे।
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आईटीएमएस के अंतर्गत चौराहों-तिराहों की नए सिरे से डिजाइनिंग और सुधार कार्य कराया जाना है। इसके लिए कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के निर्देश पर एडीएम सिटी के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी, केडीए, ट्रैफिक, एनएचएआई के अफसरों की समिति बनाई गई है। कमिश्नर ने बीते दिनों केडीए को सभी चौराहों-तिराहों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे। केडीए चीफ इंजीनियर वीके गोयल ने बताया कि कमिश्नर के निर्देश पर तैयार रिपोर्ट एडीएम सिटी को भेज दी गई है। रिपोर्ट पर फैसले के लिए प्रस्तावित समिति की बैठक में आगे की कार्रवाई तय होगी।

बिठूर रोड चौड़ीकरण में एनओसी की अड़चन
कानपुर (ब्यूरो)। कल्याणपुर-बिठूर रोड का चार लेन चौड़ीकरण का काम एनओसी के फेर में फंस गया है। रोड के दोनों ओर प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट (वन क्षेत्र) की जमीन होने के कारण चौड़ीकरण के लिए पेड़ों को काटना पड़ेगा। इसके लिए वन विभाग से एनओसी की जरूरत है। फिलहाल एनओसी के इंतजार में सड़क का काम बंद है। दोनों ओर कई जगह से सड़क खुदी पड़ी है। इससे पहले भी कई अड़चनों के चलते रोड निर्माण के काम में देरी हुई थी। केडीए ने करीब 30 करोड़ की लागत से कल्याणपुर से सिंहपुर और यहां से बिठूर तक दो चरणों में दो लेन रोड का चार लेन चौड़ीकरण का काम शुरू कराया था। इससे पहले चौड़ीकरण की राह में विद्युत लाइनें आ गई थीं। इनकी शिफ्टिंग के शुल्क पर केडीए और विद्युत विभाग में खींचतान चली। अब मामला एनओसी पर अटक गया है। केडीए चीफ इंजीनियर वीके गोयल ने बताया कि वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एनओसी मिलने के बाद रोड चौड़ीकरण का काम शुरू होगा।
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प्लाटों की डिमांड, हाईराइज प्रोजेक्ट फंसे
कानपुर (ब्यूरो)। शहर में हाईराइज रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट के फ्लैटों में रिहाईश हाईक्लास लोगों को ही भा रही है। मध्य वर्ग के बीच अभी भी प्लाटों का क्रेज फ्लैटों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इसके चलते ही शहर में केडीए और आवास विकास परिषद के सैकड़ों फ्लैटों की बिक्री नहीं हो पा रही है। प्लाटों के लिए मचने वाली मारामारी के उलट फ्लैटों के खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। दोनों ही विभागों ने लॉटरी की बजाय पहले आओ, पहले पाओ स्कीम के जरिए फ्लैटों की बिक्री शुरू की है। इसके बजाय लोग सोसाइटियों के प्लाट खरीदना अधिक बेहतर मान रहे हैं। निजी बिल्डरों की तर्ज पर केडीए और आवास विकास ने भी शहर में कई हाईराइज प्रोजेक्टों में फ्लैटों की स्कीम लांच की। केडीए ने पनकी स्थित शताब्दी नगर योजना में ड्रीम्स प्रोजेक्ट के करीब 1100 फ्लैटों की पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर बिक्री शुरू की है। करीब 27.50 लाख रुपये में टू बीएचके वाले (750 वर्ग फीट) फ्लैट मिलेंगे। आवास विकास की कल्याणपुर स्थित गंगा एन्क्लेव मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट के करीब 245 टू और थ्री बीएचके वाले फ्लैट भी इसी आधार पर उपलब्ध हैं। फ्लैटों की कीमत करीब 42 लाख रुपये से 56 लाख रुपये तक है। रीयल एस्टेट के जानकार यजुवेंद्र सिंह के मुताबिक शहर केमध्य वर्ग के बीच अभी फ्लैट कल्चर जोर नहीं पकड़ पाया है। लोगों के बीच प्लाट की डिमांड अधिक है। दूसरा फैक्टर दूरी और कीमतों का भी है। शहर के दूरदराज क्षेत्रों में स्थित सरकारी विभागों के फ्लैटों की कीमत 25 से 60 लाख रुपये तक है। फ्लैटों के लिए इतनी कीमत देने की बजाय लोग सोसाइटियों में प्लाट खरीदना अधिक पसंद करते हैं। मध्यवर्ग के बीच 10 से 15 लाख रुपये वाले फ्लैटों की डिमांड है।
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