फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिगड़ने लगी दिल्ली-एनसीआर की हवा: एक्यूआई 200 के पार, पर्यावरण मंत्री ने जांचे इंतजाम, निर्माण स्थलों पर सख्ती

Tue, 20 Oct 2026 05:04 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) समग्र रूप से मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, पर सोमवार को यह कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया।
विज्ञापन
बिगड़ने लगी दिल्ली-एनसीआर की हवा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर पर प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) समग्र रूप से मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, पर सोमवार को यह कई इलाकों में 200 के पार पहुंच गया। एनसीआर में फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में सबसे ज्यादा एक्यूआई 248 रिकॉर्ड किया गया। वहीं, ग्रेटर नोएडा 205 और गुरुग्राम 214 एक्यूआई के साथ खराब श्रेणी में आ गए हैं। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने  बैठक कर एंटी-स्मॉग गन की उपलब्धता और जल छिड़काव की समीक्षा की।

विज्ञापन


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, मंगलवार से पूरी दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में आने की आशंका है। सोमवार शाम 6 बजे पूसा में सबसे ज्यादा एक्यूआई 281 दर्ज की गई। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की ताजा सूची में भारत के 13 शहर शामिल हैं। दिल्ली इससे बाहर है। बुलंदशहर 198 एक्यूआई के साथ दुनिया में तीसरे और अगरतला 181 एक्यूआई के साथ चौथे स्थान पर रहा।

वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की निगरानी तेज कर दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को लुटियंस दिल्ली के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर ऊंची इमारतों में लगे एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की स्थापना व संचालन की स्थिति जांची। 
विज्ञापन


मंत्री ने सरदार पटेल मार्ग से निरीक्षण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्देशों के अनुसार निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक, संस्थागत और हॉस्पिटैलिटी इमारतों में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करना अनिवार्य है। भूतल के साथ पांच मंजिल या उससे अधिक ऊंची तथा 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों पर विशेष नजर रखी जाएगी। एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम का उद्देश्य धूल के कणों को हवा में फैलने से रोकना है। 

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन इमारतों में ये उपकरण नहीं लगे हैं या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सरकार की निगरानी इमारतों तक सीमित नहीं रहेगी।

एक नवंबर से वाहनों पर प्रतिबंध
मंत्री ने बताया कि एक नवंबर से बीएस-6 उत्सर्जन मानक से नीचे के वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर निर्धारित प्रतिबंध लागू होंगे। उन्होंने वाहन मालिकों से नियमों का पालन करने और वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) रखने की अपील की।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें