कानपुर। इंजीनियरिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में इस वर्ष नया ट्रेंड सामने आया है। हर बार छात्रों की पहली पसंद बनने वाला कोर कंप्यूटर साइंस (सीएस) इस सीएस एआई-एमएल (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग) से पिछड़ गया है। एचबीटीयू, सीएसजेएमयू सहित शहर के निजी संस्थानों में भी कम रैंक वाले छात्रों ने पारंपरिक सीएस, केमिकल, मैकेनिकल के बजाय एआई-एमएल जैसे नए विकल्पों को प्राथमिकता दी है।
हाल ही में एचबीटीयू की पहली सीट आवंटन की लिस्ट जारी हुई जिसमें कोर सीएस की ओपनिंग रैंक 12586 रैंक के साथ शुरू हुई। सीएस एआई-एमएल की ब्रांच में ओपनिंग रैंक की शुरुआत 6293 रैंक के साथ हुई। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में सीएस-एआई का क्रेज ज्यादा है। केमिकल इंजीनियरिंग में जहां 1,21,930 रैंक से ओपनिंग हुई है तो सीएस एआई में 84746 रैंक से ओपनिंग हुई। निजी संस्थानों में भी एआई एमएल, डेटा साइंस जैसे कोर्स को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले इनकी सीटें भर रही हैं, बाद में अन्य की।
इसी ट्रेंड को देखते हुए कई संस्थान भी अपनी सीटें और पाठ्यक्रम बदलकर एआई-एमएल जैसे आधुनिक कोर्स बढ़ा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शुक्ला का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य कारण रोजगार के बेहतर अवसर हैं। देश में एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से नौकरियों की मांग बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में लाखों पद सृजित होने की संभावना जताई जा रही है। एआई स्टार्टअप्स में बढ़ती भर्ती ने भी इस क्षेत्र को आकर्षक बना दिया है।
एचबीटीयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. वंदना कौशिक का कहना है संस्थान में पहली बार लाॅन्च हुए सीएस-एआई-एमएल के लिए छात्रों का उत्साह देखने को मिल रहा है। अब छात्र केवल डिग्री नहीं बल्कि विशेषज्ञता को भी महत्व दे रहे हैं। एआई, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसी शाखाएं भविष्य की तकनीकों से सीधे जुड़ी हैं जिससे छात्रों को बेहतर प्लेसमेंट और उच्च वेतन पैकेज मिलने की उम्मीद रहती है।