कानपुर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध का सहायक उपकरण है, न कि मानव की मौलिक सोच का विकल्प। यह बात बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल की विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विभागाध्यक्ष प्रो. मोना पुरोहित ने कही। वह गुरुवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) लीगल रिसर्च इन द एज ऑफ एआई : एथिक्स, इनोवेशन एंड एकेडमिक पब्लिशिंग” विषय पर छात्रों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने शोध नैतिकता, प्लेजरिज्म से बचाव और गुणवत्तापूर्ण अकादमिक प्रकाशन के मानकों पर विशेष जोर दिया। प्रो. पुरोहित ने स्कोपस इंडेक्स्ड जर्नल्स में शोध पत्र प्रकाशित करने की प्रक्रिया, उपयुक्त जर्नल चयन और शोध अस्वीकृति के कारणों पर प्रकाश डाला। डॉ. स्मृति रॉय, डॉ. विष्णुपति त्रिपाठी, सहायक आचार्य ऋषि श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।