अवतार ही उसे सचेत करता रहेगा
यह प्रयोग पहले 30 रोगियों पर किया जाएगा। ऐसे में रोगी को काउंसलिंग के लिए बार-बार डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसका अवतार ही उसे सचेत करता रहेगा। शुरुआत में अवसाद के रोगियों का अवतार आधारित इलाज होगा। इसके बाद इसका दायरा बढ़ा दिया जाएगा। रोगी का अपना एआई प्रारूप ही उसका फॉलोअप कर लेगा।
अवतार के पास रोगी के बारे में सभी जानकारी होगी
प्राचार्य ने बताया कि अवतार के पास रोगी के बारे में सभी जानकारी रहेगी। रोग के लक्षण, समस्याओं आदि के बारे में उसे पता रहेगा। वह रोगी की काउंसलिंग उसी आधार पर करेगा। इसके साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये यह भी पता किया जाएगा कि रोगी को अवसाद, एंजाइटी में कौन सी दवा जल्दी और अधिक फायदा करेगी। अभी रोगी में दवा का असर चार से छह सप्ताह के बाद दिखता है लेकिन एआई चिह्नित दवा जल्दी असर करेगी।
प्रोजेक्ट में शामिल होंगे 120 रोगी
इस प्रोजेक्ट में 120 रोगियों को शामिल किया जा रहा है। इसमें रोगी को दवा दी जाएगी, साथ ही सॉफ्टवेयर रोगी की स्थिति की समीक्षा करेगा। जिस दवा का जल्दी असर होगा, उसे रोगी के लिए उपयुक्त माना जाएगा। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में प्रोजेक्ट की प्रस्तुति की दौरान प्राचार्य, मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी, आईआईटी के कॉग्नेटिव साइंसेस की प्रगति बाला सुब्रमण्यम और उनकी टीम मौजूद रही।