कानपुर देहात। फरवरी के आखिरी सप्ताह में तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। मौसम में अचानक बदलाव से गेहूं की फसल को नुकसान हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान अधिक होने से गेहूं का दाना पूरी तरह से विकसित होने से पहले ही पक जाएगा। इससे पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। नुकसान की आशंका को लेकर किसान चिंतित है।
जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं का उत्पादन होता है। इस वर्ष 1.23781 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सवा दो लाख किसानों ने गेहूं की बुआई की है। शुरुआती दौर में ठंड ठीक होने पर फसल बहुत अच्छी रही। गेहूं की बाली निकल चुकी है। दाना का विकास हो रहा है, ऐसे में हल्की ठंड की जरूरत है। मौसम के परिवर्तन से तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। इससे दाना पूर्ण विकसित होने से पहले ही पकने लगा है। इससे पैदावार प्रभावित होगी।
विशेषज्ञों की माने तो गेहूं की फसल पकने के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। यह तापमान फसल को 15 मार्च के बाद मिलना चाहिए। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि एक सप्ताह में तापमान 36 डिग्री तक पहुंच सकता है। किसानों की चिंता है कि गेहूं का दाना विकसित होने से पहले की पक जाएगा तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
गेहूं की फसल में बनाए रखें नमी
- मौसम के बदलने से फसल पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करने के लिए खेत में नमी बनाए रखें। जिला कृषि अधिकारी सुमित पटेल ने बताया कि गेहूं की फसल के लिए मौसम नुकसानदायक है। फसल की हल्की सिंचाई करें। खेत में पानी भरने न पाए। अगर पानी भर दिया गया तो हवा से फसल के गिरने का डर रहेगा। इससे भी पैदावार प्रभावित होगा। केवल हल्की नमी खेत में रखकर तापमान के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। नमी रहने से गर्मी का असर पूरी तरह से नहीं होगा।
50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है पैदावार
जिले की भूमि गेहूं की फसल के लिए उपयुक्त है। इसके लिए चलते गेहूं की औसतन पैदावार प्रति हेक्टयेर 50 क्विंटल तक होती है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अगर इस बीच बारिश हो जाती है तो मौसम में परिर्वतन होगा इससे फसल को कुछ राहत मिल सकती है। अगर ऐसा ही मौसम रहा तो 15 से 20 फीसदी तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- 1.23781 हेक्टयर है गेहूूं का रकबा
- सवा दो लाख किसान ने तैयार की है गेहूं की फसल
- 50 क्विंटल प्रति हेक्टयर होता है उत्पादन
- 20 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है उत्पादन