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प्रशासन का सर्वे पूरा, बीमा कंपनी का अधूरा

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कानपुर देहात। बीमा कंपनी अभी तक बरसात और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे नहीं करा सकी है। इससे किसानों में नाराजगी है। जिले में 44 हजार किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया था।
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फसलों को नुकसान होने पर शासन की तरफ से आंकलन कर किसानों को राहत दी जाती है। वहीं बीमा कराए किसानों को कंपनी क्लेम देती है। किसानों को मार्च के पहले सप्ताह में बारिश व ओलों से काफी नुकसान हुआ है। किसानों ने टोल फ्री नंबर सहित बीमा कंपनी के अधिकारियों को फसल नुकसान की जानकारी भी दी थी। इसके बाद भी किसानों के नुकसान का सर्वे नहीं हो सका है। राजपुर के बैना गांव के रामबली ने सात बीघा खेत में अरहर व गेहूं बोया था।
बारिश में पूरी तरह से फसल बर्बाद हो गई। दुर्राजपुर गांव के रामसेवक ने छह बीघा में लाही व गेहूं बोई थी। अब वह चौपट हो चुकी है। खेत में खाने भर को नहीं बचा है। रसूलाबाद के सिठऊ मताना गांव के अशोक कुमार ने बताया कि दस बीघा खेत में आलू व गेहूं की फसल की थी। ओले व बारिश से दोनों फसलें खराब हो चुकी है।
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रसूलाबाद के केशवनगर निवासी राम प्रताप सिंह ने 27 बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। बारिश से फसल चौपट हो चुकी है। सभी किसानों ने फसल का बीमा कराया था। उनका कहना है कि अभी तक कंपनी की ओर से सर्वे नहीं किया गया है। न्यू इंडिया इंश्योरेंस के जिला प्रबंधक सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि कंपनी की ओर से लगातार सर्वे कराया जा रहा है। अप्रैल के आखिरी तक सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
69 किसानों को धान का भुगतान नहीं
नेफेड ने केंद्रों पर धान तो खरीदा, लेकिन ऑन लाइन फीडिंग की अंतिम तिथि का ध्यान नहीं रखा। अंतिम तिथि निकल गई और फीडिंग नहीं हो सकी। अब 69 किसान भुगतान फंसने से भटक रहे हैं। क्रय एजेंसी पर किसानों का 65 लाख रुपये फंसा है।
खाद्य विभाग को छोड़कर अन्य एजेंसियों को धान खरीद 24 जनवरी तक करनी थी। इसी दिन क्रय किए गए धान की ऑन लाइन फीडिंग भी करानी थी। तय की गई क्रय एजेंसी नेफेड ने केंद्रों पर धान की खरीद की, लेकिन ऑनलाइन फीडिंग का ध्यान नहीं रखा। क्रय केंद्र पर किसानों के पहुंचने पर इन केंद्रों पर 31 जनवरी तक धान खरीद हुई। साइट 24 जनवरी को बंद हो गई तो नेफेड क्रय की गई धान की फीडिंग नहीं करा सका। अब फीडिंग के अनुसार की नेफेड को बजट मिला तो किसानों को भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। नेफेड शासन में अपने तर्क रख रहा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी शिशिर कुमार ने बताया कि लखनऊ में नेफेड के शाखा प्रबंधक को एडीएम वित्त एवं राजस्व साहब लाल की ओर से पत्र लिखा गया है। लंबित भुगतान जल्द होने की उम्मीद है।
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