कानपुर। अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड की जांच में नए-नए तथ्य पुलिस के सामने आ रहे हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, अधिवक्ता राजाराम की मौत के बाद सितंबर 2022 में नामांतरण का आदेश हुआ था जो तीन माह में निरस्त हो गया था। इसके बाद भी वर्ष 2025 तक जमीन के एग्रीमेंट किए गए। एग्रीमेंट कराने के मामले में पुलिस ने बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी से पूछताछ की थी।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि राजाराम वर्मा के छोटे बेटे शिवाजी एनटीपीसी में कार्यरत थे। उनकी वर्ष 2016 में पीजीआई लखनऊ में इलाज के दौरान डेंगू से मौत हो गई थी। हालांकि राजाराम के परिवार ने इस मौत को संदिग्ध माना था। वहीं, आरोप है कि शिवा की मौत के बाद मां कृष्णा ने एनटीपीसी के अधिकारियों से शिकायत की थी जिससे सरकारी भुगतान की धनराशि बहू रेखा वर्मा को न मिले। वहीं, शिवा की पत्नी रेखा ने वर्ष 2017 में ससुर राजाराम, सास कृष्णा, जेठ नरेंद्र और ननद पर कई आरोपों में नवाबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें परिवार के लोगों को जेल भी जाना पड़ा था। जेल से बाहर आने पर कुछ साल बाद 21 दिसंबर 2021 को दरवाजे पर अधिवक्ता राजाराम की गोली मार कर हत्या हो गई थी। उनकी मौत के बाद सितंबर 2022 में उनकी बेशकीमती जमीन के नामांतरण को लेकर कोर्ट ने आदेश जारी किया था। आदेश के अनुसार राजाराम की जमीन उनके बेटे नरेंद्र देव, छोटी बहू रेखा वर्मा और बेटी भोलेश्वरी के नाम होनी थी। हालांकि इस नामांतरण आदेश के खिलाफ आरोपी राजबहादुर के भाई राजनारायण और उसके परिवार ने याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने दिसंबर में नामांतरण का आदेश खारिज कर दिया था।पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। इसमें नए तथ्य सामने आ रहे हैं। उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीसरे निदेशक ने बेटे की बीमारी का हवाला देकर मांगा समय
पुलिस के अनुसार, एनआरआई सिटी के निदेशक मंडल में एसके पालीवाल, राकेश गुप्ता, ओम प्रकाश अग्रवाल और उनके भाई श्री प्रकाश अग्रवाल शामिल थे। इनमें से श्री प्रकाश ने वर्ष 2009 में ही इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से तीन निदेशक ही बचे हैं। इनमें से पुलिस एसके पालीवाल और राकेश गुप्ता से पूछताछ कर चुकी है। पुलिस ने पूछताछ के लिए सिविल लाइंस निवासी निदेशक ओम प्रकाश अग्रवाल को भी बुलाया है। हालांकि उन्होंने बेटे की तबीयत खराब होने के चलते शहर से बाहर होने की बात कहकर पुलिस से कुछ वक्त मांगा है। एनआरआई सिटी के लीगल एडवाइजर शैलेश शाह से हुई पूछताछ में भी पुलिस को अहम सबूत मिले हैं।