आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे जमीन मुआवजे में खेल की शिकायत कर रहे सैकड़ों किसान
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे की जमीन खरीद में करोड़ों का खेल किया गया था। जांच शुरू होते ही परत दर परत खुलासा होना शुरू हो गया है। सपा सरकार के डर से जो लोग बोल नहीं पा रहे थे वो अब अपना दुखड़ा भाजपा के सांसद-विधायकों के सामने सुना रहे हैं। शनिवार को सौ से ज्यादा किसान जमीन मुआवजे में ‘बड़ा खेल’ होने का सबूत लेकर उन्नाव से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह के सामने जा पहुंचे। यहां एक साथ सैकड़ों शिकायतों का ढेर देखकर विधायक हैरान रह गए और कहा कि किसानों का अत्याचार करने वालों को किसी हाल में नहीं छोड़ा जायेगा। हर एक जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूर होगी। उन्नाव से 63 किमी लंबे इस एक्सप्रेस-वे के लिए 50 गांवों की 661.314 हेक्टेयर जमींन ली गई थी। मुआवजे में जमकर खेल होने की बात किसान कह रहे हैं। किसानों ने बताया कि किसी को 10 लाख तो किसी को 25 लाख तक प्रति बीघा मुआवजा दिया गया था। शनिवार को बांगरमऊ तहसील के किसानों ने विधायक कुलदीप सेंगर से मिलकर अपनी शिकायत बताई। ग्रामीणों के मुताबिक तहसील क्षेत्र की सरकारी भूमि और तालाबो में जमकर खनन रसूखदार लोगों ने धन का बंदर बांट किया।
कम मुआवजा देकर सपा सरकार में जमीन ले ली गई
सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी की सरकार में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ियों की शिकायत की जांच कराने का फैसला शुक्रवार को किया था। एक्सप्रेस-वे से संबंधित सभी 10 जिलों के डीएम को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब करने को कहा गया था। इस बीच एक्सप्रेस वे बनवाने वाली संस्था यूपीडा के वित्त नियंत्रक हटा दिए गए। अब किसानों की उम्मीदें नई सरकार से बंधी हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें कम मुआवजा देकर सपा सरकार में जमीन ले ली गई थी। वहीं कुछ लोगों की शिकायत है कि जमीन का बैनामा हो गया लेकिन उन्हें जमीन की रकम ही नहीं मिली। 302 किमी. लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण में करीब 11526.73 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें जमीन के अधिग्रहण में करीब 2591 करोड़ रुपये खर्च रकम भी शामिल है।
प्रोजेक्ट पर इस तरह के उठते रहे हैं सवाल
सवाल उठाए जाते रहे हैं कि इस प्रोजेक्ट के एनाउंस होने के पहले ही कुछ लोगों ने एक्सप्रेस वे के एलाइनमेंट के आसपास की जमीन किसानों व अन्य लोगों से खरीदी। कुछ दिन बाद ही जब इस प्रोजेक्ट का एलान हुआ तो उन्होंने सरकार को जमीन दी और सहमति के आधार पर काफी ऊंची रकम हासिल कर मालामाल हुए। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि प्रोजेक्ट एनाउंस होने के पहले ही संबंधित क्षेत्र के चुनिंदा लोगों को इसकी जानकारी दी गई जिसका बाद में उन्हें भरपूर फायदा मिला। विधान परिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने यह मामला उठाया था और इस एक्सप्रेस वे के भूमि अधिग्रहण में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इसके लिए निशाना बनाया था।
ये हैं 10 जिले- आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, कानपुर नगर, उन्नाव, औरैया, कन्नौज, हरदोई और लखनऊ।