जनपद के जिन 63 हजार लोगों को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है, उनका फिर से सत्यापन कराने का कार्य 25 मई से शुरू हो जाएगा। शासन ने यह निर्देश जिला प्रशासन को दिया है। पता लगाया जाएगा कि जो लोग इस योजना का लाभ ले रहे हैं, वे सभी इसके वास्तविक हकदार हैं भी या नहीं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि इसके लिए एक गाइड लाइन भी जारी की गई है। इस कार्य को पूरे जनपद में कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें लाभ पाने वाले की पारिवारिक आर्थिक स्थित पर विशेष फोकस किया जाएगा। निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि जो लाभार्थी पूरा ब्योरा फिर से क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को उपलब्ध नहीं कराएगा उसकी पेंशन रोक दी जाएगी। प्रशासन को आशंका है कि कुछ लोग गलत तरीके से पेंशन पा रहे हैं, जिनका पता लगाया जाना है। जिस समय समाजवादी पेंशन योजना शुरू हुई थी। उसी समय से ही इसमें गड़बड़ी शुरू हो गई थी। पेंशन जारी होने से पहले लाभार्थियों के चयन से लेकर अब तक तीन बार सर्वे हो चुका है। लेकिन प्रशासन आज तक गलत तरीके से पेंशन लेने वालों को नहीं रोक पाया है। पिछले दिनों गड़बड़ी की मिली कई शिकायतों को देखते हुए नए तरीके से सर्वे कराने की व्यवस्था की गई है।
इन लोगों को नहीं मिल सकती है समाजवादी पेंशन
- यदि परिवार में किसी सदस्य को वृद्धावस्था पेंशन, विकलांग पेंशन और विधवा पेंशन मिल रही है तो ऐसे लोगों को समाजवादी पेंशन नहीं मिलेगी।
- जिस परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी या गैर सरकारी संस्थान में कार्यरत है। उसके परिवार को पेंशन नहीं मिलेगी।
- जिनके परिवार में ग्रामीण क्षेत्र में आधा हेक्टेयर खेती और एक हेक्टेयर बिना खेती वाली जमीन है या फिर शहरी क्षेत्र में 25 वर्ग मीटर से अधिक भूमि या मकान हो तो उसे पेंशन नहीं मिलेगी।
- जिसके पास मोटर साइकिल है, कृषि उपकरण हैं। उन्हें भी इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- परिवार में कोई भी आयकर दाता है, तो उसे भी पेंशन नहीं मिलेगी।