जिला उपभोक्ता फोरम में एक वादी ने पिता की मौत के पांच साल बाद अपने हक की लड़ाई जीत ली है। फोरम ने वादी को इलाज में खर्च रुपयाें के भुगतान का आदेश सुनाया है। मुकदमा दाखिल करने की तारीख से भुगतान की तिथि तक आठ प्रतिशत ब्याज और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देने को कहा है।
जवाहर नगर निवासी रामकृष्ण सोनकर ने सात दिसंबर 2012 को सेंट्रल गर्वनमेंट हेल्थ स्कीम नई दिल्ली के निदेशक जनरल और अपर निदेशक जनरल कानपुर के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। रामकृष्ण सोनकर पिता स्व. राम प्रसाद सोनकर रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के कर्मचारी थे।
2004 में उसकी मां शांति देवी को हृदय रोग की समस्या हुई तब उन्हे हैलट में भर्ती कराया गया था। उस दाैरान प्रभारी डॉ. आरती लाल चंदानी ने शांति देवी को स्वरूप नगर स्थित शर्मा अस्पताल में इलाज के लिए रेफर कर दिया। उनके इलाज मे 11 हजार 137 रुपये खर्च हुआ था।
पिता ने इलाज में खर्च का क्लेम किया था लेकिन खर्च राशि नहीं दी गई। इस बीच उनकी मां का 2009 में और पिता का निधन 2011 में हो गया। रामकृष्ण अपनी मां और पिता का उत्तराधिकारी है। इसलिए वह क्लेम पाने का अधिकारी है। उनके सीजीएचएस कार्ड से पूरे परिवार काे इलाज में खर्च राशि पाने का अधिकार था।
मामले में विपक्षी ने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्लेम का सत्यापन कराने में पाया गया कि रेफर वाले कागज पर डॉ. आरती लाल चंदानी के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर थी। इसलिए क्लेम खारिज किया गया था।
फोरम अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह, सदस्य पुरुषोत्तम सिंह और सुधा यादव ने विपक्षी की इस बात को खारिज कर दिया। सवाल किया कि अगर डॉ. आरती लाल चंदानी के हस्ताक्षर फर्जी थे तो उन्होंने वादी के पिता के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। इसलिए वादी को क्लेम की राशि का भुगतान किया जाए।