मृतक के पिता राजकरण ने बताया कि गांव से पोस्टमार्टम हाउस 30 किलोमीटर से ज्यादा है। शव ले जाने के लिए पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद डाक्टर व अन्य कर्मचारियों से वाहन के लिए कहते रहे। कई बार 108 व 102 को फोन भी लगाया तो सभी ने कहा कि शव ले जाने के लिए वाहन नहीं मिलेगा।
काफी देर तक परिजन परेशान रहे इसके बाद बाइक से ही मृत बालक के शव को लेकर वह गांव की ओर रवाना हो गए। गांव ले जाकर शव का अंतिम संस्कार किया। सीएमओ डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि, कोई भी गरीब होता है तो उसे वाहन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कोई मांग नहीं की है, अपनी मर्जी से बाइक पर शव को लेकर चले गए हैं।