10 से 15 आयु वर्ग का समूह
उन्होंने बताया कि एक समूह 10 से 15 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं का है। कोविड काल में इनके पढ़ने की आदत छूट गई। अब इन्हें गणित में सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। इससे बच्चे परीक्षा फोबिया, अवसाद और एंजाइटी की गिरफ्त में हैं। विषय समझने की क्षमता घट गई है। इसके साथ ही इनमें आत्महत्या का ख्याल आने लगा है। वहीं दूसरा समूह 16 से 18 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं का है। इनकी मानसिक स्थिति पहले समूह से थोड़ी अलग है।
युवाओं का समूह
उन्होंने बताया कि दूसरे बड़े समूह के छात्र-छात्राओं में कॅरिअर की चिंता रहती है। इसकी वजह से ये एंजाइटी की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसके साथ ही याददाश्त में दिक्कत आई है। इन्हें भी गणित से अधिक परेशानी है। इस ग्रुप के बच्चे अधिक उग्र हो गए हैं, चोरी करने लगे हैं और नशे की लत लग गई है। जो अमीर घर के बच्चे हैं वे ड्रग्स, शराब का अधिक इस्तेमाल करते पाए गए। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे स्मैक और दूसरे सस्ते नशे के लती हो गए।
कोरोना काल के बाद बच्चों में संक्रमण अधिक
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर और डॉ. सोनिया भट्ट ने बताया कि कोरोना काल में बच्चे दो साल घर के अंदर रहे। इससे उनके इम्युनिटी सिस्टम की गतिविधि धीमी हो गई। अब बाहर निकल रहे हैं तो संक्रमण अधिक हो रहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमण से इम्युनिटी सिस्टम विकसित होता है और शरीर में एंटीबॉडीज बनती है। इससे बच्चों में एलर्जी की भी दिक्कत बढ़ी है।
ऐसे पहचानें बच्चे की मानसिक दिक्कत
- अचानक बहिर्मुखी या अंतर्मुखी हो जाएं।
- पसंद की चीजें अचानक बंद कर दें।
- सामान्य आदतों में बदलाव आ जाए।
- पैसा चोरी करने लगें, नशा करने लगें।
- चिड़चिड़ापन रहे, खुराक कम हो जाए।