सोमवार को पारित केंद्र सरकार के आम बजट पर मिलीजुली प्रक्रियाएं व्यक्त की गईं। मंगलवार को एसएएफ मजदूर यूनियन के बैनर तले एसएएफ के बाहर हुई सभा में कर्मचारी नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर कहा कि बजट में टैक्स की लिमिट पांच लाख करने की मांग की अनदेखी की गई। पीएफ पर टैक्स वसूले जाने का कर्मचारी और श्रमिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। समाजवादी छात्रसभा नगर ग्रामीण इकाई ने आम बजट को नकारते हुए कहा कि सरकार की घोषणाओं से छात्रों और स्कूल कालेजों का भला होने वाला नहीं है। इसी क्रम में जन अधिवक्ता मंच ने वित्त मंत्री अरुण जेटली का पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया। मंच के महामंत्री रवींद्र शर्मा ने कहा कि अधिवक्ताओं के हित कोई घोषणा नहीं की गई। उधर मकान या फ्लैट खरीदने वालों को टैक्स में छूट से लोगों में उत्साह है। जबकि, सीए मनु अग्रवाल और दीप कुमार मिश्रा का मानना है कि इस बजट में कर अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाई गई है, जो कि करदाता के हित में है।