कानपुर। शहर के खुले नाले लोगों की जिंदगी निगल रहे हैं लेकिन नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों के आक्रोशित होने पर पुलिस और नगर निगम के अधिकारी जांच का हवाला देकर मामला रफादफा कर देते हैं। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी अपने ढर्रे पर चलते रहते हैं।
शहर में करीब 1,454 नाले हैं। इसमें अभियंत्रण विभाग के 245 बड़े नाले और स्वास्थ्य विभाग के 1209 छोटे नाले हैं। इनमें से रफाका और सीओडी जैसे बड़े नाले तो नहीं ढके जा सकते हैं लेकिन छोटे नालों पर पटिया लगाने का कार्य भी नहीं किया जा रहा है। यह छोटे खुले नाले लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं। इनमें गिरकर शहरियों की जान जा रही है। शिकायतों के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। आए दिन दुर्घटनाए हो रही हैं।
यहां खुले पड़े हैं नाले
गोविंदनगर, दादानगर, बर्रा, खाड़ेपुर, योगेंद्र विहार, हंसपुरम, दामोदरनगर, बाबूपुरवा, नौबस्ता, यशोदानगर, पनकी, रावतुपर, कल्याणपुर, ग्वालटोली, चकेरी, गांधीग्राम आदि इलाकों में छोटे नाले जगह-जगह खुले पड़े हैं।
यहां हो चुकी घटनाएं
15 जून 2025: गीतानगर क्रॉसिंग के पास खुले नाले में गिरकर टाइल्स ठेकेदार छपेड़ा पुलिया के सलीम की मौत।
एक मार्च 2025: महाराजपुर में पुलिस को देखकर भागे जुआरियों में से एक नीरज की नाले में गिरने से मौत।
25 जनवरी 2025: जाजमऊ के जेके प्रथम चौराहे के पास फुटपाथ की टूटी स्लैब से नारायण गार्डन निवासी आसिफ की नाले में गिरकर मौत।
18 दिसंबर 2024: खलासी लाइन में घर के बाहर खेल रही पांच साल की रागिनी की सीसामऊ नाले की टूटी फर्श से नीचे गिरकर मौत।
16 दिसंबर 2023: चकेरी के गांधीग्राम निवासी पंकज श्रीवास्तव की नाले में गिरकर मौत।
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