उद्योग निदेशालय में नियम विरुद्ध किए गए 105 वैयक्तिक सहायकों और आशुलिपिकों के समायोजन का आदेश शासन से निरस्त कर दिया गया है। इससे अब ये सभी अपने पुराने पद पर आ गए हैं। अब इनका बढ़ा हुआ वेतन वापस लिया जाएगा।
8 सितंबर 2010 के निर्णय के अनुसार नियुक्ति / पदोन्नति की जानी थी लेकिन मार्च-अप्रैल 2012 में 105 वैयक्तिक सहायकों और आशुलिपिकों का वरिष्ठता और आरक्षण के आधार पर समायोजन किया गया था, जिसमें नियमों की काफी अनदेखी की गई थी।
एक ही व्यक्ति को अलग-अलग पदों पर समायोजित किया गया। कुछ कर्मियों को समयावधि के पूर्व ही समायोजित किया गया। आरक्षित वर्ग के कार्मिकों को आरक्षण रोस्टर का लाभ दिया गया। सुप्रीम कोर्ट की रोक थी कि इस ग्रेड पे में कोई बदलाव न किए जाएं।
वर्ष 2007 की सेवा नियमावली की धारा सात ए के तहत जो ग्रेडेशन जारी किया गया हो उसको आधार मानकर कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। इस आर्डर के बाद भी समायोजन किया गया। समायोजन में वरिष्ठता का भी ध्यान नहीं रखा गया।
अधिक संख्या में कर्मियों का समायोजन यूपी इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट स्टेनोग्राफर्स एसोसिएशन के महामंत्री एवं तत्कालीन उप्र. सरकार स्टेनोग्राफर्स महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष डीएस मिश्रा ने 20 जून 2012 को आशुलिपिक संवर्ग के समायोजन की अनियमितताओं को लेकर आयुक्त एवं निदेशक उद्योग से शिकायत की थी।
शिकायत में कहा गया कि सामान्य श्रेणी के कर्मचारियों को मात्र उच्चीकरण का लाभ दिया गया जबकि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से इसमें प्रोन्नति का भी लाभ दिया गया।
शिकायती पत्र में कहा गया कि दो कर्मचारियों को क्रमश: दो आॅर्डरों में एक ही दिन से दो पदों पर क्रमश: प्रतिस्थापित किया गया जो आप्रसंगिक है। एकल संवर्ग में अलग-अलग वरिष्ठता जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है फिर भी अलग-अलग आर्डर जारी किए गए।
इसकी जांच के बाद शासन ने 105 वैयक्तिक सहायकों और आशुलिपिकों के समायोजन का आदेश निरस्त कर आदेश जारी किया है।