इटावा। जिले की तीनों प्रमुख अनाज मंडियों में किसानों के साथ योजनाबद्ध तरीके से ठगी का खेल खेला जा रहा है। कच्ची पर्ची पर आढ़ती और राइस मिलर पक्के मुनाफे का खेल खेल रहे है। जिले की तीन प्रमुख मंडियों में हरदिन लगभग 30 हजार बोरी धान की आवक हो रही है, लेकिन 90 फीसदी से अधिक किसानों को पक्की रसीद नहीं है। तीनों मंडियों में आढ़ती एक सादे कागज पर हिसाब लिखकर दे रहें हैं।
ऐसे में जहां राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकारी दामों से कम दामों पर धान खरीदकर सरकारी आदेशों का भी खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।
जिले में इस वर्ष लगभग 67 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई की गई थी। धान की कटाई का काम भी लगभग 20 दिन से चल रहा है। हालांकि बीते दिनों बारिश के कारण कटाई पर ब्रेक लग गया था। इसके बाद भी मंडियों में धान की आवक हो रही है। जिले में धान खरीद की प्रमुख तीन मंडियां हैं। इनमें शहर में स्थित नवीन मंडी, भरथना और जसवंतनगर शामिल है। धान की सबसे ज्यादा आवक भरथना और जसवंतनगर मंडी में है। तीनों मंडियों में जानकारी के अभाव में आढ़ती किसानों के साथ धोखा करते हैं। ऐसा धोखा जो खुद अधिकतम किसानों को भी नहीं पता चलता है। फसल बिक्री के बाद किसानों को उनकी फसल की बिक्री की सादा कागज पर पर्ची बनाकर दे दी जाती है। वहीं, मंडी समिति की ओर से दी जाने वाली 6-आर रसीद उन्हें नहीं दी जाती है, जो किसानों के साथ धोखा है।
ये होती है 6-आर रसीद
सरकार की ओर से कृषि से होने वाली आय को कर मुक्त रखा गया है। ऐसे में यह कैसे पता चलेगा कि कौन सी आय कृषि की है और कौन सी व्यवसाय की। इसीलिए मंडी में फसल बिक्री के समय किसानों को 6-आर रसीद काटकर दिए जाने की व्यवस्था है। यह रसीद दाखिल करने पर आयकर नहीं देना होता है। इससे किसानों को अन्य सरकारी योजनाओं में भी सहूलियत होती है। लेकिन अधिकतर आढ़ती इस रसीद को देने से बचते है।
अधिकारियों से बचने के लिए बड़े किसानों की काट देते रसीद
नाम न छापने की शर्त पर इटावा नवीन मंडी के एक आढ़ती ने बताया कि 6-आर रसीद देने से आढ़ती को पूरे तौल का लेखाजोखा समिति की निगाह में डालना होता है। कुछ आढ़ती कम दामों में धान को खरीदकर डंप कर लेते है। फिर सरकारी खरीद चालू होने पर अच्छे दामों में सरकारी केंद्रों पर बेच देते हैं। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो जाता है। अगर वह किसानों को 6-आर उपलब्ध कराते हैं तो फिर उन्हें सही कीमतों पर ही खरीद करनी होगी। कुछ आढ़ती शाम के समय कुछ बड़े किसानों की 6-आर रसीद काट कर रख लेते हैं। इससे वह अधिकारियों की निगाह पर नहीं आते और कार्रवाई से बच जाते हैं।