फाइल किया गया तीन साल का आईटीआर आय का आंकलन करने में सबसे ज्यादा सहायक
एक्सीडेंटल क्लेम के लिए आईटीआर दाखिल करना फायदेमंद है। किसी भी पीड़ित को क्लेम दिलाने में कोर्ट एक तय मल्टीप्लाई फार्मूले से दुर्घटना में मरे या विकलांग हुए व्यक्ति की आय का आंकलन करती है। उसी आधार पर पीड़ित को क्लेम दिलाया जाता है। ऐसे में फाइल किया गया तीन साल का आईटीआर आय का आंकलन करने में सबसे ज्यादा सहायक है। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में लोगों को इसी तरह की सलाह दी है। कानपुर दुर्घटनाओं में देश में दूसरे नंबर पर है। इसलिए शहरियों को इस ओर जागरुक होना चाहिए।
अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जीएस सिंघवी ने राधाकृष्ण बनाम गोकुल आदि के मामले की सुनवाई करते हुए आय के आंकलन का सबसे अच्छा श्रोत आईटीआर बताया है। राधाकृष्ण के 19 साल के बेटे नीलेश की दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह इंजीनियरिंग का अंतिम वर्ष का छात्र था। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अंतिम वर्ष पूरा करने के बाद कम से कम उसकी नौकरी 60 हजार रुपये महीने की लगती। अगर वह 15 हजार रुपये अपने ऊपर खर्च करता तो भी परिवार को हर माह 45 हजार रुपये देता। इस आधार पर सात लाख क्लेम दिलाया गया। अधिवक्ता का कहना है कि शहर में दुर्घटनाओं का आंकड़ा चिंताजनक है। इसलिए हर शहरी को इस ओर जागरुक होना चाहिए।
कैसे किया जाता क्लेम
दुर्घटना में किसी की मौत या गंभीर रुप से घायल होने पर संबंधित वाहन को कवर करने वाली बीमा कंपनी के खिलाफ जिला जज की कोर्ट में क्लेम दाखिल होता है। इसके बाद जिला जज की कोर्ट से अन्य कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा जाता है। दुर्घटना स्थल वाले जिले या फिर पीड़ित परिवार अपने रहने वाले जिले की कोर्ट में क्लेम दाखिल कर सकता है।